September 27, 2021

MotherlandPost

Truth Always Wins!

जाति आधारित सर्वेक्षण की मांग को लेकर 10 राजनीतिक दलों का प्रतिनिधिमंडल करेगा प्रधानमंत्री से मुलाक़ात

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव समेत 10 राजनीतिक दलों के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को सुबह 11 बजे जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाला है।

 

 

रविवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे जनता दल (यूनाइटेड) सुप्रीमो ने कहा, “जाति आधारित जनगणना सिर्फ़ बिहार के लिए नहीं होगी, पूरे देश के लोगों को इससे फ़ायदा होगा। हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम (10 विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल) जाति आधारित जनगणना की अपनी मांग के साथ कल सुबह 11 बजे पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।”

बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी नीतीश कुमार की जदयू जाति आधारित जनगणना के पक्ष में है। वह देश में जाति आधारित जनगणना की वकालत करते रहे हैं और इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था।

RJD नेता तेजस्वी यादव ने भी जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। इसपर बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा था कि “जाति गणना की मांग सिर्फ़ बिहार ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों की भी मांग है। बिहार में विपक्षी दल भी हमारे साथ प्रधानमंत्री से मिलना चाहते थे। हमने इस संबंध में प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था।”

“हम जाति आधारित जनगणना चाहते हैं और यह हमारी लंबे समय से चली आ रही मांग है। जाति आधारित जनगणना सभी जातियों को उनकी सटीक संख्या प्राप्त करने में मदद करेगी ताकि उसी के अनुसार नीतियां बनाई जा सकें। जाति जनगणना सभी के हित में है। ये समूचे देश के हित में है। जाति जनगणना के संबंध में निर्णय लेना केंद्र सरकार का काम है। यह राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है। इस बीच, कुमार ने कहा है कि अगर केंद्र सहमत नहीं होता है तो “बिहार जाति आधारित जनगणना करने के लिए आगे बढ़ेगा।”

संसद के हाल ही में संपन्न मानसून सत्र के दौरान संविधान (एक सौ सत्ताईसवां संशोधन) विधेयक, 2021 पर बहस में कई विपक्षी सदस्यों के साथ जाति आधारित जनगणना की मांग उठाने और आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने के साथ व्यापक भागीदारी देखी गई।

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी सदस्यों ने भी जाति आधारित जनगणना की मांग की थी। भाजपा के कुछ सहयोगियों ने भी ऐसी ही मांग की है।

केंद्र की वीपी सिंह सरकार ने 1990 में ओबीसी के लिए आरक्षण प्रदान करने की मंडल आयोग की सिफ़ारिश को लागू किया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और जनता दल-यूनाइटेड के राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ जाति जनगणना की लगातार मांग कर रहे हैं ताकि विभिन्न समूहों की आबादी को स्पष्ट तरीके से समझा जा सके। उन्होंने कहा, “अगर हमें यह नहीं पता कि हममें से उसमें कितने हैं, तो (जनगणना का) क्या उपयोग है।”

राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सरकार अपने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के नारे को हकीकत में बदलने में सक्षम होगी अगर उसे पता है कि विकास की आखिरी कतार में कौन खड़ा है। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी को चिन्हित कर, उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं।

राजीव रंजन सिंह ने कहा, “यह स्पष्ट होना चाहिए और हमें वास्तविक स्थिति पता होनी चाहिए। अगर सरकार को पता है कि प्रत्येक जाति की आबादी क्या है, तो यह नीतियां बनाने में मदद करेगी।” जद (यू) नेता ने कहा कि पिछली जाति जनगणना 1931 में हुई थी और मंडल आयोग ने भी अपनी सिफ़ारिशों के लिए उस डेटा का इस्तेमाल किया था।

Translate »