Monday, September 26, 2022

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कोरोना का नया वैरिएंट आया सामने, वैक्सीन से बेअसर रहने की भी आशंका

by MotherlandPost Desk
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कोरोना महामारीके लिए जिम्मेदार वायरस SARS-Cov-2 का नया वैरिएंटमिला है। यह वैरिएंट पहले साउथ अफ्रीका और फिर कई दूसरे देशों में पाया गया है।

Credit- WHO

स्टडी के मुताबिक यह ज्यादा संक्रामक है और वैक्सीन के असर से बचा रहता है।साउथ अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) और क्वाजुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म (KRISP) के वैज्ञानिकों ने कहा कि इस साल मई में देश में पहली बार C.1.2 वैरिएंट का पता चला। इसके बाद 13 अगस्त तक यह वैरिएंट चीन, रिपब्लिक ऑफ दि कांगो, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड में पाया गया है।

म्यूटेशन से हुआ खतरनाक

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट कैटेगरी का हो सकता है। WHO के मुताबिक वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट कोरोना के ऐसे वैरिएंट हैं जो वायरस के ट्रांसमिशन, गंभीर लक्षणों, इम्यूनिटी को चकमा देने, डायग्नोसिस से बचने की क्षमता दिखाते हैं। एक स्टडी में कहा गया है कि C.1.2 इससे पहले मिले C.1 के मुकाबले काफी हद तक म्यूटेट हुआ है। C.1 को ही दक्षिण अफ्रीका में कोरोना की पहली लहर के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए चुनौती

वायरोलॉजिस्ट उपासना रे का कहना है कि यह वैरिएंट स्पाइक प्रोटीन में C.1.2 लाइन में जमा हुए कई म्यूटेशन का नतीजा है, जो इसे 2019 में चीन के वुहान में पहचाने गए मूल वायरस से बहुत अलग बनाता है। कोलकाता के CSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी से जुड़ी उपासना ने कहा कि यह ज्यादा संक्रामक और तेजी से फैलने की क्षमता रखता है। स्पाइक प्रोटीन में बहुत सारे म्यूटेशन होते हैं, इसलिए यह इम्यून सिस्टम से बच सकता है और दुनिया भर में चल रहे वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए एक चुनौती है।

 

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