October 24, 2021

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फ़्रांस के वे पादरी जिन्होंने 2 लाख बच्चों का यौन शोषण किया

मंगलवार को की गई एक व्यापक जाँच के खुलासे के बाद ये बात सामने आई है कि फ्रांसीसी पादरियों ने 70 सालों में 2 लाख से ज़्यादा बच्चों का यौन शोषण किया और इन वर्षों में इस अपराध पर चर्च ने हमेशा अपनी आंखें बंद रखीं।

French church
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रिपोर्ट को संकलित करने वाले आयोग के प्रमुख जीन-मार्क सॉवे ने कहा कि चर्च ने इतने सालों से ‘गहरी क्रूर उदासीनता’ दिखाई है और इस अपराध के शिकार बच्चों के बजाय वो ख़ुद को बचाता रहा है।

उन्होंने बताया कि ज़्यादातर पीड़ित लड़के थे जिनकी उम्र 10 से 13 वर्षों के बीच है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ रिपोर्ट में कहा गया है, “इस संकट का सामना करते हुए, बहुत लंबे समय तक कैथोलिक चर्च की तत्काल प्रतिक्रिया एक संस्था के रूप में खुद को बचाने के लिए थी और इसने दुर्व्यवहार का सामना करने वालों के प्रति पूर्ण, यहां तक ​​कि क्रूर, उदासीनता दिखाई है।”

अधर में आस्था

इस ख़ुलासे के बाद हालात इतने गंभीर दिखाई पड़ रहे हैं जिनके बारे में इससे पहले सोचा भी नहीं गया था। लगातार आ रहे यौन शोषण के मामलों के बाद, ये रिपोर्ट रोमन कैथोलिक चर्च की व्यवस्था पर ताज़ा चोट करती है, जिसमें अक्सर बच्चों को इनका शिकार होना पड़ता है।

पोप फ्रांसिस ने उन पीड़ितों की सराहना की है जो इतनी जटिलताओं के बावजूद सामने आए और अपराध की शिक़ायत की।

वेटिकन के एक बयान में कहा गया है, “सबसे पहले उनकी संवेदना पीड़ितों और उनके घावों पर जाती है।”
“उनके विचार चर्च की ओर जाते हैं ताकि वे इस भयानक सच्चाई से सीखकर इसे पूरी तरह ख़त्म कर सकें।”

बिशपों के फ्रांसीसी सम्मेलन के प्रमुख एरिक डी मौलिन्स-ब्यूफफ़ोर्ट ने कहा कि इस मामले पर चर्च शर्मिंदा है। उन्होंने रिपोर्ट को किसी बजर की तरह मानते हुए माफ़ी मांगी और कार्रवाई करने का वादा किया।

बता दें कि इस आयोग की स्थापना 2018 के अंत में फ्रांस में कैथोलिक बिशपों द्वारा शोषण के मामलों का संज्ञान लेने और घटती प्रमाणिकता के समय में चर्च में जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए की गई थी। यह आयोग चर्च से अलग होकर काम करता है।

सौवे ने कहा कि समस्या अभी भी है। उन्होंने कहा कि चर्च ने 2000 के दशक तक पीड़ितों के प्रति पूरी संवेदना दिखाई लेकिन 2015-2016 से इसने पूरी तरह अपना नज़रिया बदलना शुरू कर दिया।

चर्च में बदलाव की माँग

सेक्शुअलिटी, आज्ञाकारिता और पुजारी की पवित्रता जैसे विषयों पर कैथोलिक चर्च की शिक्षा ने इनपर अंधा विश्वास बनाने का काम किया जिससे पादरियों को यौन शोषण करने के लिए बढ़ावा मिला।

सौवे ने कहा कि अगर चर्च को लोगों का विश्वास दोबारा हासिल करना है तो उसे अपनी कमियों को पूरी तरह सुधारने की ज़रूरत है।

Chruch
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आयोग ने कहा कि जो हुआ उसके लिए चर्च को ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शोषण की रिपोर्ट न्यायिक अधिकारियों को सौंपी जाए।

उन्होंने आगे कहा कि चर्च को पीड़ितों को पर्याप्त वित्तीय मुआवज़ा भी देना चाहिए, ये उस अपराध के लिए काफ़ी नहीं है लेकिन बेहद ज़रूरी है क्योंकि ये पीड़ित की मानसिक चोट को भर सकता है।

कितनों का कब-कब हुआ शोषण?

रिपोर्ट के अनुसार यह अपराध 1950-1970 में अपने चरम पर था जिसके बाद 1990 के दशक में इसमें दोबारा वृद्धि हुई।
यौन शोषण के अनेकों मामले क़ानून में फँसकर साफ़ तौर ओर बाहर नहीं आ पाते लेकिन राज्य के प्रोसिक्यूटर्स ने इस बात पर चर्च को चेताया है कि अपराध चाहे जब भी किया गया हो, उसका मुआवज़ा पीड़ित को मिलना चाहिए।

इसमें सिफ़ारिशों की एक सूची शामिल है, जिसमें चर्च द्वारा बच्चों या कमज़ोर लोगों के साथ नियमित संपर्क में रहने वाले किसी भी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड की व्यवस्थित रूप से जाँच करना और पुजारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है।

सौवे ने कहा कि आयोग ने खुद गवाही के लिए एक कॉल के माध्यम से लगभग 2,700 पीड़ितों की पहचान की थी, और हज़ारों अन्य मामलों की भी पहचान हुई थी।

अनुसंधान और मतदान समूहों द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन का अनुमान है कि लगभग 216,000 पीड़ित थे, और आम सदस्यों द्वारा शोषण की शिक़ायत को गिनने के बाद ये संख्या बढ़कर 330,000 हो सकती है।

सौवे ने कहा कि ये आँकड़ें चौंकाने वाले थे। उन्होंने कहा कि पिछले 70 वर्षों में फ्रांसीसी चर्च में लगभग 2,900-3,200 संदिग्ध पीडोफ़ाइल(बच्चों के प्रति यौन शोषण के विचार रखने वाला) होने का अनुमान है।

‘धब्बा’

चर्च दुर्व्यवहार के शिकार और पीड़ितों के संघ ला पैरोल लिबेरी के संस्थापक फ्रेंकोइस देवॉक्स ने रिपोर्ट के प्रेजेंटेशन में चर्च के प्रतिनिधियों से कहा, “आप हमारी मानवता पर एक धब्बा हैं। इस नर्क में कई घिनौने सामूहिक अपराध हुए हैं… लेकिन इससे भी बदतर, विश्वास के साथ विश्वासघात, मनोबल के साथ विश्वासघात, बच्चों के साथ विश्वासघात हुआ है।”

Church
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उन्होंने चर्च पर कायरता का आरोप लगाया और आयोग को यह कहते हुए धन्यवाद दिया कि ये रिपोर्ट कहानी में नया मोड़ लाएगी। उन्होंने कहा “आप अंततः पीड़ितों को चर्च की ज़िम्मेदारी की संस्थागत मान्यता देते हैं।”

ये फ़्रेंच रिपोर्ट ब्रिटेन के कथन के एक साल बाद आई है जिसमें उसने बताया था कि कैथोलिक चर्च को 1970 और 2015 के बीच इंग्लैंड और वेल्स में बच्चों के यौन शोषण के 3 हज़ार से ज़्यादा मामलों में 900 से अधिक शिक़ायतें मिली थीं, और 2016 से एक साल में 100 से ज़्यादा रिपोर्ट दर्ज की गई।

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