January 21, 2022

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ज्ञान की अलख जगाने वाली फ़ातिमा शेख़- डॉ आसिफ़ उमर

महिलाओं और वंचित समुदाय में शिक्षा की रोशनी भरने वाली भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख को उनकी जयंती पर भारत ही नहीं दुनिया नमन कर रही है। आज यानी 9 जनवरी को फातिमा शेख की 191वीं जयंती है।

फातिमा शेख का जन्म 9 जनवरी 1831 के दौरान पुणे में हुआ था। वह हमेशा से शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान में शामिल रहती थीं। वह अपने भाई उस्मान के साथ रहा करती थीं। आपको बता दें जब समाज सुधारक ज्योति बा फुले और सावित्री बाई फुले को दलित और गरीबों को शिक्षा देने के विरोध में उनके पिता ने घर से निकाल दिया था, तब फातिमा शेख और उनके भाई ने दोनों लोगों को अपने घर मे शरण दी थी।

 

फातिमा शेख को भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के साथ साल 1848 में स्वदेशी पुस्तकालय की स्थापना की थी। जिसमें महिलाएं और वंचित समुदाय के लोग शिक्षा ग्रहण कर सकें और आगे बढ़ सकें वही पुस्तकालय आगे चल कर लड़कियों के लिए मिसाल बना बना उसे ही महिलाओं का भारत में पहला स्कूल कहा गया।
बता दें इन्हीं स्कूलों में उन लोगों को शिक्षा देने का महायज्ञ शुरू हुआ जिनमें जाति, धर्म, लिंग के आधार पर उस वक्त शिक्षा से वंचित रखा जाता था। अपने इस मिशन में उन्हें कई कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। समाज के प्रभावशाली तबके ने उनके काम में खलल डालकर परेशान किया गया लेकिन फातिमा शेख ने हार नहीं मानी और अपने देश की महिलाओं और वंचित समुदाय को उनका हक दिलाकर मानी।

फातिमा शेख ने पुस्तकालय की स्थापना घर से की और इसके बाद उन्होंने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर समाज के गरीब लोगों और मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा देने का काम शुरू किया। सबसे रोचक तथ्य यह है कि फातिमा शेख बच्चों को अपने घर में पढ़ने के लिए घर-घर से बुलाकर लाया करती थीं और उन बच्चों को पढ़ाती थीं। ऐसा करने से फातिमा शेख हमेशा के लिए भारतीय इतिहास में अमर हो गईं और भारत ही नहीं पूरी दुनिया मे एक मिसाल बनीं।

लेखक – डॉ आसिफ़ उमर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया-नई दिल्ली

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