Saturday, October 1, 2022

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री का तालिबान की ओर दोस्ताना रवैया, कहा उनका आर्थिक पतन हुआ तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

by Disha
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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफ़ग़ानिस्तान को छोड़ देता है तो इससे युद्धग्रस्त राष्ट्र का आर्थिक पतन होगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।

 

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कुरैशी ने यह भी कहा कि यह अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास में एक ज़रूरी क्षण है। बता दें कि कुरैशी की टिप्पणी जर्मन विदेश मंत्री हेइको मास की इस्लामाबाद यात्रा के बीच आई है, जहां दोनों मंत्रियों के द्विपक्षीय मुद्दों और क्षेत्रीय स्थितियों पर चर्चा करने का कार्यक्रम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लगे रहना चाहिए। मानवीय सहायता प्रवाहित होनी चाहिए।

 

‘उनका आर्थिक पतन न होने दें’

कुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में आर्थिक पतन न होने दें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान में हालात बिगाड़ने वालों की भूमिका के बारे में सतर्क रहने का भी आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ‘शांति के लिए खड़े लोगों और स्थिति बिगाड़ने वालों के बीच अंतर करना’ आवश्यक है।

हालांकि, जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि अगर तालिबान एक समावेशी सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो यह देखा जाना होगा कि क्या वे वादों को पूरा करते हैं। मास ने कहा, “हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि सभी अफ़ग़ान, यहां तक ​​कि जो तालिबान का समर्थन नहीं करते हैं, वे भी इस सरकार द्वारा प्रतिनिधित्व महसूस करते हैं और यह देखा जाना बाकी है कि तालिबान इसे ध्यान में रखते हैं या नहीं।”

कुरैशी ने कहा कि मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के सम्मान पर तालिबान के हालिया बयान उत्साहजनक हैं। चार्टर उड़ानों को फिर से शुरू करना इसकी ओर इशारा करता है।

मास ने यह भी कहा कि हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के फिर से चालू होने के बाद जर्मनी अन्य देशों के साथ निकट समन्वय में चार्टर उड़ानों को व्यवस्थित करने की तैयारी कर रहा है ताकि योग्य अफ़ग़ानों को जर्मनी ले जाया जा सके।

कुरैशी और मास ने अफ़ग़ानिस्तान पर ध्यान केंद्रित करते हुए विविध क्षेत्रों और क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा में द्विपक्षीय सहयोग विकसित करने के बारे में भी बात की। कुरैशी ने यह भी कहा कि चूंकि जर्मनी यूरोपीय संघ में पाकिस्तान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए संभावनाएं हैं कि आर्थिक संबंधों को विकसित करके व्यापार को बढ़ाया जा सकता है।

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