September 26, 2021

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‘जब सब ख़त्म हो जाता है तब वो प्रकट होते हैं’, अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी पर कसा तंज़

संसद का मॉनसून सत्र विपक्ष के पेगासस और कृषि क़ानून जैसे मुद्दों पर हंगामें के कारण तीन दिन पहले ही समाप्त कर दिया गया। जबकि सत्र का समापन 13 अगस्त को होना था।

 

ANI

 

इस बाबत लोकसभा में विपक्षी नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह केवल विपक्ष को बदनाम करना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए ये भी कहा कि सत्र में वे केवल एक दिन दिखे।

उन्होंने कहा, “मैंने आज पहली बार प्रधानमंत्री मोदी को सदन में देखा। जब सब ख़त्म हो जाता है तब वो प्रकट होते हैं।”
बता दें कि आज यानी बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी के साथ लोकसभा अध्यक्ष के साथ मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे।

हालाँकि, संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में आए थे। लेकिन उसी दिन विपक्ष ने पेगासस का मुद्दा उठाया था और हंगमा खड़ा हो गया था।

कांग्रेस सांसद चौधरी ने कहा, “हम पेगासस, महँगाई, किसान आंदोलन पर चर्चा करना चाहते थे। हमारे बार-बार आग्रह करने पर भी सरकार ने हमें पेगासस पर चर्चा नहीं करने दी।”
इतना ही नहीं चौधरी ने ये भी आरोप केंद्र पर लगाये कि सरकार ने पेगासस के मामले में सदन के भीतर और बाहर अलग-अलग बयान दिए।

इन हंगामे के कारण संसद महज़ 21 घण्टे ही चल पाई। इस बात पर खेद जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, “10वीं लोकसभा का छठा सत्र आज समाप्त हो गया। इस सत्र में अपेक्षाओं के अनुरूप सदन का काम नहीं हुआ। मेरे मन में इसे लेकर वेदना है।”

उन्होंने आगे कहा, “सदन की कार्यवाही 74 घंटे 46 मिनट तक नहीं चली. सदन की उत्पादकता 22 प्रतिशत रही। इस दौरान कुल 20 बिल पारित हुए जिनमें ओबीसी बिल भी शामिल है।”

अध्यक्ष बिरला ने बताया कि संसद के इस सत्र में लोकसभा को 96 घंटे बैठना था मगर वह 74 घंटे 46 मिनट तक स्थगित ही रहा। उन्होंने ये भी कहा कि तख़्तियाँ उठाना, लोकसभा के आसन के सामने नारे लगाना संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा,”मैंने अपनी ओर से पूरा प्रयास किया, कई दौर की वार्ता भी की गई लेकिन कई मुद्दों को लेकर सफलता नहीं मिली। इस बार लगातार गतिरोध रहा जो समाप्त नहीं हो पाया।”

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