September 27, 2021

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तालिबान के कब्जे में अफगानिस्तान, मुल्ला बरादर संभाल सकते हैं अफगानिस्तान की कमान

रविवार को तालिबानियों के काबुल में प्रवेश होते ही अफगान सरकार उनसे समझौता करने को तैयार हो गई और इसी के साथ अफगानिस्तान अब पूरी तरह तालिबान के कब्जे में आ
गया है।

Credit AP

अब अफगानिस्तान में सत्ता का ट्रांसफर किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मुल्ला बरादर अखंद अंतरिम सरकार के प्रमुख हो सकते हैं।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने छोड़ा देश

तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उपराष्ट्रपति अमीरुल्लाह सालेह ने देश छोड़ दिया है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों अमेरिका जा रहे हैं। तो वहीं काबुल की पुलिस आत्मसमर्पण करने लगी है और वह अपना हथियार तालिबान को सौंप रही है।

काबुल के कई शहरों पर तालिबान का कब्जा

तालिबान ने काबुल के चार बाहरी जिले सारोबी, बगराम, पग़मान और काराबाग़ पर कब्जा कर लिया है। हालांकि तालिबान ने अपने लड़ाकों से काबुल के बाहरी गेट पर रुकने के लिए ही कहा था। वहीं तालिबान ने काबुल की बगराम जेल के बाद पुल-ए-चरखी जेल को भी तोड़ दिया है और करीब 5 हजार कैदियों को छुड़ा लिया है। बता दें पुल-ए-चरखी अफगानिस्तान की सबसे बड़ी जेल है। यहां ज्यादातर तालिबान के लड़ाके बंद थे। काबुल के नागरिक बता रहे हैं कि लोग काबुल में अपने घरों पर तालिबान के सफेद झंडे लगा रहे हैं।

शांति से सत्ता हासिल करना उद्देश्य

अफगानिस्तान के कार्यवाहक गृहमंत्री अब्दुल सत्तार मीरजकवाल ने बताया था कि तालिबान काबुल पर हमला नहीं करने के लिए राजी हो गया है। उन्होंने बताया शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता का ट्रांसफर चाहते हैं और ये इसी तरह होगा। नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रहें। वहीं, तालिबान ने भी बयान जारी करके कहा था कि वो नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी लेता है।

कौन हैं मुल्ला बरादर?

सूत्रों के मुताबिक, मुल्ला बरादर अभी कतर में हैं और अभी वो तालिबान के कतर में दोहा स्थित दफ्तर के राजनीतिक प्रमुख हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए कई लोगों के नामों पर विचार किया जा रहा है लेकिन उनका नाम शीर्ष पर है। वो अफगानिस्तान में तालिबान का को-फाउंडर है।

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