November 27, 2021

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तमिलनाडु में बाढ़ से बर्बाद हुईं फ़सलें, संघर्ष के बीच किसानों ने की मुआवज़े की माँग

तमिलनाडु: एक फार्मर बॉडी ने बुधवार को कहा कि कम से कम पांच लाख एकड़ में खड़ी धान की फसल मानसून की बारिश के कारण ‘क्षतिग्रस्त’ हो गई है और इसी के चलते प्रति हेक्टेयर 50,000 कृषि इनपुट मुआवज़े की मांग की गई है।

 

Tamilnadu floods/Reuters

 

हालांकि तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि उसने कावेरी डेल्टा क्षेत्रों में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नुक़सान का आकलन करें।

टीएन फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल फ़ार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी आर पांडियन ने कहा कि नागपट्टिनम और तंजावुर सहित कावेरी डेल्टा क्षेत्रों में कम से कम पांच लाख एकड़ में सांबा और थलाडी दोनों में धान की फसल को नुक़सान पहुंचा है।

पांडियन ने पीटीआई से कहा, “हम सरकार से प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये का मुआवज़ा देने का आग्रह करते हैं। मुआवज़ा और वितरण में पारदर्शिता होनी चाहिए। लाभार्थियों की ग्राम स्तर की सूची किसानों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि पिछले अन्नाद्रमुक शासन के दौरान, इनपुट के लिए प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपये राहत के रूप में प्रदान किए गए थे और यह काफ़ी नहीं था।

कई कारकों को देखते हुए पांडियन ने कहा सरकार को फसल का बीमा कराने वाले किसानों को मुआवज़ा देने की ज़िम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।

‘सांबा’ और ‘थलाडी’ तुलनात्मक रूप से धान की लंबी अवधि की फसलें हैं, जबकि ‘कुरुवई’ कम समय की फसल है। राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री, केकेएसएसआर रामचंद्रन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि, “तिरुवरुर सहित डेल्टा क्षेत्रों के ज़िला कलेक्टरों को धान की फसल को हुए नुक़सान का तुरंत आकलन करने की सलाह दी गई। उन्होंने सरकार को अवगत कराया है कि “धान की फसल प्रभावित हुई है।”

बता दें कि चावल की खेती का गढ़ माने जाने वाले तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्रों में हाल ही में भारी वर्षा हुई है। 9 नवंबर को, नागपट्टिनम में 31 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसी तरह, अन्य डेल्टा क्षेत्रों में भी तंजावुर (16-17 सेंटीमीटर) और तिरुवरुर (19 सीएम) सहित भारी वर्षा हुई।

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