November 27, 2021

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BIG BREAKING: तीनों कृषि कानून वापस, पीएम नरेंद्र मोदी ने की घोषणा, अब खत्म हो जाएगा किसान आंदोलन!

अभी-अभी एक सबसे बड़ी खबर आ रही है करीबन 10 महीनों से अधिक से चल रहे किसान आंदोलन  की जीत हुई है , किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे उसे भारत के केंद्र सरकार द्वारा वापस ले लिया गया है।
यूपी दौरे से पहले इसकी घोषणा खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में की आइए आपको बताते हैं कि आखिर पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या-क्या कहा।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया और तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की। इन क़ानुनों को पिछले साल 26 नवंबर को संसद ने पास किया था।पीएम मोदी ने कहा कि कृषि में सुधार के लिए तीन कानून लाए गए थे। ताकि छोटे किसानों को और ताकत मिले। सालों से ये मांग देश के किसान और विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री मांग कर रहे थे। जब ये कानून लाए गए, तो संसद में चर्चा हुई। देश के किसानों, संगठनों ने इसका स्वागत किया, समर्थन किया। मैं सभी का बहुत बहुत आभारी हूं। साथियों हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए देश के कृषि जगत के हित में, गांव, गरीब के हित में पूर्ण समर्थन भाव से, नेक नियत से ये कानून लेकर आई थी। लेकिन इतनी पवित्र बात पूर्ण रूप से किसानों के हित की बात हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। भले ही किसानों का एक वर्ग इसका विरोध कर रहा था। हमने बातचीत का प्रयास किया। ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया। पीएम मोदी ने कहा, हमने कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया। साथ ही पीएम मोदी ने किसानों से अपील की, आप अपने अपने घर लौटे, खेत में लौटें, परिवार के बीच लौटें, एक नई शुरुआत करते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ये भी बहुत सुखद है कि डेढ़ साल के अंतराल के बाद करतारपुर साबिह कॉरिडोर अब फिर से खुल गया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने किसानों का भी जिक्र किया। पीएम ने कहा, मैंने पिछले कई दशकों तक किसानों की परेशानियों को बहुत करीब से देखा, महसूस किया। जब से मुझे मौका मिला, हमारी सरकार उनकी बेहतरी के लिए काम करने में जुट गई।

इन कानूनों की वापसी के साथ सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर के पास किसानों का आंदोलन अब खत्म हो जाएगा। किसानों ने जो अपने टेंट गाड़े थे। घर बनाया था यह सारी चीजें अब माना जा रहा है कि वापस अपने घर की ओर चली जाएगी किसानों का एक वर्ग काफी दिनों से सिंघु बॉर्डर पर और गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार इसका विरोध कर रहा था। जिसमें कई किसानों की जानें भी गई इस कृषि कानून के वापसी से अब यह आंदोलन भी यहीं पर समाप्त हो जाएगा।

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