Monday, September 26, 2022

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‘सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए’ – इलाहाबाद हाइकोर्ट

by Disha
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बुधवार को इलाहाबाद हाइकोर्ट ने गोहत्या के आरोपी जावेद को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा कि जब देश की संस्कृति और उसकी आस्था को ठेस पहुंचती है तो देश कमज़ोर हो जाता है।

 

 

जस्टिस शेखर कुमार यादव ने अपने 12 पन्नों के फ़ैसले में कहा कि आवेदक ने चोरी करने के बाद गाय को मार डाला, उसके सिर काटे और उसका मांस भी रखा। “यह आवेदक का पहला अपराध नहीं है। इससे पहले भी उसने गोहत्या की थी जिसने समाज के सद्भाव को बिगाड़ दिया था।”

अदालत ने आगे कहा, “मौलिक अधिकार केवल गोमांस खाने वालों का विशेषाधिकार नहीं है। बल्कि, जो गाय की पूजा करते हैं और उन पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं, उन्हें भी एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। जीवन का अधिकार मारने के अधिकार से ऊपर है। और गोमांस खाने के अधिकार को कभी भी मौलिक अधिकार नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट ने कहा, ‘सरकार को संसद में भी एक बिल लाना होगा और गायों को राष्ट्रीय पशु घोषित करना होगा और उन्हें नुकसान पहुंचाने की बात करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून बनाना होगा। गौशाला आदि बनाकर गौ रक्षा की बात करने वालों के लिए भी क़ानून आना चाहिए। लेकिन गोरक्षा से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य गोरक्षा के नाम पर पैसा कमाना है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हमारे देश में सैकड़ों उदाहरण हैं कि जब भी हम अपनी ‘संस्कृति’ को भूल गए, तो विदेशियों ने हम पर हमला किया और हमें ग़ुलाम बना लिया। आज भी, अगर हम नहीं जागे, तो हमें निरंकुश तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े नहीं भूलना चाहिए।”

गाय से जुड़े महत्व पर बल देते हुए न्यायालय ने कहा, “ऐसा नहीं है कि केवल हिंदुओं ने गायों के महत्व को समझा है, मुस्लिम शासकों ने भी अपने शासनकाल के दौरान गाय को भारत की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।

बाबर, हुमायूं और अकबर ने अपने धार्मिक त्योहारों में गोहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था। मैसूर के शासक हैदर अली ने गोहत्या को संज्ञेय अपराध बनाया था।

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