May 13, 2021

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अमेरिका ने लगाई रूस पर पाबंदी, क्या होगा दोनों देशों का भविष्य?

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने गुरुवार को रूस पर अमेरिकी चुनाव, साइबर-हैकिंग, यूक्रेन को धमकाने और अन्य “निंदनीय” कृत्यों में कथित हस्तक्षेप के लिए दंडित करने के लिहाज़ से उसपर एक व्यापक प्रतिबंध लगा दिया है।

अमेरिका ने रूसी कंपनियों को “ब्लैक लिस्ट” में डाल दिया, रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और रूसी संप्रभु ऋण बाज़ार पर सीमाएं लगा दीं। हालांकि बाइडन प्रशासन ने कहा कि वाशिंगटन मामलों को बढ़ाना नहीं चाहता।

रूस की प्रतिक्रिया

मास्को ने गुस्से में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इससे खतरनाक रूप से दोनों देशों के बीच का तनातनी बढ़ सकती है।
इन कार्रवाइयों के बीच, राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी सरकार को रूसी अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र को मंज़ूरी न देने के लिए एक कार्यकारी आदेश जारी किया यह आदेश रूस के संप्रभु ऋण जारी करने की रूस की क्षमता को प्रतिबंधित करने के लिए किया। साथ ही इसका उपयोग 2020 के अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप के लिए मॉस्को को दंडित करने के लिए किया जिससे रूस इनकार करता आया है।
Russian Embassy in US Credit- Wikipedia
बाइडन ने अमेरिकी वित्तीय संस्थानों को 14 जून से रूबल प्रभावी संप्रदाय वाले रूसी संप्रभु बांड के लिए प्राथमिक बाज़ार में भाग लेने से रोक दिया। अमेरिकी बैंकों को भी 2019 से ग़ैर-रूबल संप्रभुता के लिए प्राथमिक बाज़ार में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है।
अमेरिकी ट्रेज़री ने 32 संस्थाओं और व्यक्तियों को भी ब्लैकलिस्ट किया, जिन्होंने कहा था कि 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और अन्य “विघटन और हस्तक्षेप के कृत्यों” को प्रभावित करने के लिए रूसी सरकार द्वारा निर्देशित प्रयास किए गए थे।
क्रेमलिन ने कार्यकारी आदेश के प्रकाशन में आगे बोलते हुए कहा कि प्रतिबंधों से बाइडन और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शिखर सम्मेलन की संभावना कम हो जाएगी। रूस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मास्को निकट भविष्य में प्रतिबंधों का जवाब देगा।

क्यों लगाया गया है प्रतिबंध

रूस पर 2020 के अमेरीकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप का आरोप है हालाँकि रूस ने चुनावों में मध्यस्थता से इनकार किया और एक साइबर हैक को ऑर्केस्ट्रेट करने की बात भी नकारी, आरोप अनुसार जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनी सोलरवाइंड कॉर्प SWI.N का इस्तेमाल अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया गया था।
रूस क्रेमलिन समीक्षक अलेक्सी नवालनी को ज़हरदेने के लिए एक एजेंट का उपयोग करने की बात से भी इनकार करता है। 
रूस में उन आरोपों को भी खारिज कर दिया है जिनमें दावा होता है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों पर इनाम रखा है।
US embassy in Russia Credit- Wikipedia
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने संवाददाताओं से कहा, “हमने अमेरिका को उनके शत्रुतापूर्ण कदमों के परिणामों के बारे में बार-बार चेतावनी दी है, जो ख़तरनाक रूप से दोनों देशों के बीच टकराव को बढ़ाते हैं।”
उन्होंने ये भी कहा कि हालाँकि राष्ट्रपति जो बाइडन राष्ट्रपति पुतिन से रिश्तों में सुधार के हितैषी होने की बात कह चुके हैं लेकिन हमें उनके काम से कुछ उल्टा ही लग रहा है।
व्हाइट हाउस ने कहा कि वह वाशिंगटन डी.सी. में 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित कर रहा है, जिसमें रूसी ख़ुफ़िया सेवाओं के प्रतिनिधि भी शामिल थे और पहली बार है जब  औपचारिक रूप से रूसी विदेशी ख़ुफ़िया सेवा (एसवीआर) को सोलरविंड्स हैक के अपराधी के रूप में नामित किया गया है।

बाइडन सरकार का पक्ष

बाइडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, जेक सुलिवन ने इस प्रतिबंधों को “हानिकारक रूसी कार्यों के जवाब में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए आनुपातिक उपाय” के रूप में वर्णित किया।
“उनका (बाइडन) लक्ष्य एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय प्रतिक्रिया प्रदान करना है स्थिति को और जटिल बनाना नहीं।,” सुलिवन ने समाचार एजेंसी सीएनएन को बताया।
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष मार्क वार्नर ने कहा कि प्रतिबंध यह दिखाने के लिए एक अच्छा कदम था कि इस तरह की (चुनाव में हस्तक्षेप) कार्यवाही स्वीकार्य नहीं है।
USA and Russia conflict vector concept, two fists in colors of American and Russian Federation flags. Political, economic and military confrontation of two countries, America vs Russia themes
उन्होंने कहा, “इस हैक का पैमाना और दायरा किसी भी तरह से बहुत बड़ा जिसे हमने पहले देखा है और प्रतिबंधों को स्पष्ट करना चाहिए कि हम रूस और अन्य विरोधियों को अमेरिकी लक्ष्यों के ख़िलाफ़ इस तरह की दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधि करने के लिए ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं।”
इससे ये तो स्पष्ट है कि अमेरिका और रूस के बीच तनातनी और बढ़ सकती है। साथ ही रूस के रवैये से तो यह लगता है कि यह मामला सुलझने की राह पर फ़िलहाल तो नहीं है।
अब देखना ये है कि अमेरिका के रूस पर इस प्रतिबंध से उनके साथ-साथ अन्य देशों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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