October 24, 2021

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हैती अप्रवासियों के साथ हुए दुर्व्यवहार के बाद अमेरिकी विशेष राजदूत ने दिया इस्तीफ़ा

अमेरिका के विशेष राजदूत डिनायल फूटे ने हैती के शरणार्थियों और अप्रवासियों के निर्वासन के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है। यह बात उन्होंने एक पत्र लिखकर बताई।

 

AFP

 

इस पत्र में उन्होंने लिखा कि भूकंप और राजनीतिक अस्थिरता से भाग रहे लोगों को वापस भेजने का फ़ैसला “अमानवीय” था।

बता दें कि पिछले हफ़्ते अमेरिका ने टेक्ससस के सीमावर्ती शहर से इन लोगों के निर्वासन के लिए उड़ाने शुरू की थीं। 37 डिग्री सेल्सियस की तपती धूप में 13,000 लोग इकट्ठे हुए थे और कम्पों में थे। अधिकारियों को इन्हें भोजन और पानी मुहैया कराने में काफ़ी दिक़्क़त पेश आई थी। अमेरिका से रविवार तक कुल 1400 लोगों को हैती लौटाया जा चुका है।

इस बाबत इस्तीफ़ा देते हुए अपने त्याग पत्र में फूटे ने लिखा कि हैती इस समय एक बर्बाद देश बन गया है और वो हज़ारों की संख्या में वापस लौटाए गए अप्रवासियों का बोझ नहीं उठा सकता क्योंकि वहाँ ख़ुद भुखमरी जैसे हालात हैं।

 

क्या कहता है बाइडन पक्ष?

दूसरी तरफ़ व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “विशेष दूत फूटे के पास अपने कार्यकाल में आप्रवासन के बारे में उनकी चिंता बताने के पर्याप्त अवसर थे। लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया।”

इसके साथ ही साकी ने घोड़ों पर सवार अमेरिकी अधिकारियों के प्रवासियों को भगाने की तस्वीरों पर भी टिप्पणी की जिसे लेकर बाइडन प्रशासन पर कई सवाल उठ रहे थे।

साकी ने कहा, घोड़ों पर चढ़े अमेरिकी अधिकारियों के प्रवासियों को भगाने की जो तस्वीरें सामने आयी हैं, वो भयावह हैं। और अब इस क्षेत्र में घोड़ों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।”

ग़ौरतलब है कि समाचार एजेंसी AFP द्वारा ली गई इन तस्वीरों के बाद वह दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गईं। घोड़े लेकर हैती के अप्रवासियों की ओर बढ़ते, उन्हें डराते और कोड़े से मारते अधिकारियों की अमानवीयता की तुलना ग़ुलामी और अश्वेतों के साथ हुए ऐतिहासिक दुर्व्यवहार से भी की गई। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद बाइडन प्रशासन पर कई तरह के सवाल उठे और उसपर दबाव भी बढ़ा।

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