May 14, 2021

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देश में ऑक्सीजन की भारी कमीं के बीच सरकार क्यों कर रही है निर्यात?

पूरे भारत में कोरोना संक्रमण के चलते स्थिति भयावह हो गयी है। देश वायरस की दूसरी लहर की चपेट में है जहाँ लोगों को साँस लेने में तकलीफ़ हो रही है। इस तकलीफ़ के चलते उन्हें ऑक्सीजन की ज़रूरत है जिसकी माँग तेज़ी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत ऑक्सीजन का निर्यात दोगुना कर रहा है। सरकारी आँकड़ों द्वारा इस बात की पुष्टि होती है।

ग़ौरतलब है कि अप्रैल 2020 और जनवरी 2021 के दरम्यान भारत ने 9,000 मीट्रिक टन से भी ज़्यादा ऑक्सीजन का निर्यात किया है। आँकड़ों के अनुसार वित्तवर्ष 2020 के में महज़ 4,500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन निर्यात किया गया था जिसके बाद अकारण ही यह बढ़कर दोगुना हो गया है।
Credit- businessinsider
समाचार एजेंसी एनडीटीवी इंडिया के अनुसार, “जनवरी, 2020 के मुकाबले, जब भारत से 352 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया गया था, जनवरी, 2021 में ऑक्सीजन के निर्यात में 734 प्रतिशत की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर, 2020 में देश ने 2,193 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया था, जो दिसंबर, 2019 में किए गए 538 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के निर्यात की तुलना में 308 फीसदी ज़्यादा है।”
आपको बता दें कि अब तक फ़रवरी और मार्च 2021 के निर्यात आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
ऐसे समय में जब देश में ऑक्सीजन की भारी कमीं देखी जा रही है और लोग अपनी जान गँवा रहे हैं, उस समय सरकार की ये नीतियाँ सवाल खड़े करती हैं।
बीते कई दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों से ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी कमीं देखी जा रही है। मंगलवार को ही दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों ने बताया कि उनके पास ऑक्सीजन ख़त्म होने की कगार पर है और कोई बड़ी दुर्घटना घटी सकती है। इसके बाद देर रात उन अस्पतालों ऑक्सीजन पहुँचाया गया।
Credit- ThePrint
इस बाबत 22 अप्रैल को ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर पाबंदी लगाने के सरकार के फ़ैसले को दिल्ली हाइकोर्ट ने कड़े शब्दों में लताड़ा था, कोर्ट ने कहा, “ऐसा आज ही क्यों नहीं किया गया? क्यों 22 अप्रैल तक इंतज़ार करना चाहिए? जिन्दगियां दांव पर लगी हैं, क्या आप मरीज़ों से ऑक्सीजन के लिए 22 अप्रैल तक इंतज़ार करने के लिए कहेंगे?”
कोर्ट ने आगे कहा, “आर्थिक हित इंसानी ज़िन्दगी से ज़्यादा अहम नहीं हो सकते, वरना हम त्रासदी की ओर बढ़ रहे हैं।”
हाल ही में केंद्र सरकार ने कहा था कि निजी अस्पतालों में मारीज़ों की ‘मानसिक ज़रुरतों’ के चलते उन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन दिया जा रहा है, जिसके कारण उसका दुरुपयोग हो रहा है। सरकार ने राजधानी सहित सभी राज्यों को ऑक्सीजन के इस्तेमाल को तार्किक बनाने की बात कही, साथ ही कहा कि उन मारीज़ों को ऑक्सीजन न दी जाए जिन्हें क्लीनिकली इसकी ज़रूरत नहीं है।
अनेक राज्यों ने केंद्र से मदद की गुहार लगाई है जिसके बाद केंद्रीय गृहसचिव अजय भल्ला की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की गई, जिसमें स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, नीति आयोग के सदस्य डॉ वी.के. पॉल तथा अन्य अधिकारी शामिल थे जिसमें देश में कोरोना से उत्पन्न होने वाले चिंताजनक हालातों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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