October 26, 2021

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तालिबान के VC को बर्ख़ास्त करने के बाद, प्रोफ़ेसर्स समेत 70 से ज़्यादा अफ़ग़ान टीचिंग स्टाफ़ ने दिया इस्तीफ़ा

तालिबान द्वारा बुधवार को पीएचडी धारक कुलपति मुहम्मद उस्मान बाबरी को बर्खास्त करने और उनकी जगह बीए डिग्री धारक मुहम्मद अशरफ ग़ैरत को नियुक्त करने के बाद सहायक प्रोफ़ेसरों और प्रोफ़ेसरों सहित काबुल विश्वविद्यालय के लगभग 70 शिक्षण कर्मचारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया।

 

Lokmat

 

बता दें कि काबुल स्थित सबसे बड़े विश्वविद्यालय में ग़ैरत की वीसी के रूप में नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध हो रहा है। आलोचकों ने पिछले साल ग़ैरत के एक ट्वीट को हाइलाइट किया है जिसमें उन्होंने पत्रकारों की हत्या को सही ठहराया था।

खामा प्रेस न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, लोग अफ़ग़ानिस्तान में सबसे पहली और बेहतरीन यूनिवर्सिटी में एक युवा ग्रेजुएट डिग्री धारक के एक अनुभवी पीएचडी धारक की जगह लेने के कारण बेहद नाराज़ हैं।

खामा प्रेस न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के कुछ सदस्यों सहित लोगों ने इस कदम की आलोचना की है और कहा है कि उनसे ज़्यादा योग्य अन्य लोग हैं।

 

कौन हैं मुहम्मद अशरफ़ ग़ैरत?

ग़ैरत पिछली सरकर में शिक्षा मंत्रालय में कार्यरत थे और अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में IEA के विश्वविद्यालयों के मूल्यांकन निकाय के प्रमुख थे।

इससे पहले, तालिबान ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर बुरहानुद्दीन रब्बानी(पूर्व अफ़ग़ान राष्ट्रपति और अफ़ग़ानिस्तान की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के संस्थापक) के नाम पर एक सरकारी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर काबुल शिक्षा विश्वविद्यालय कर दिया।

बुरहानुद्दीन रब्बानी के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम 2009 में उनके घर पर एक आत्मघाती हमले में मारे जाने के बाद रखा गया था।

उच्च शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक निर्देश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अफ़ग़ानिस्तान की बौद्धिक संपदा है और उसका नाम राजनीतिक या जातीय नेताओं के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।

निर्देश में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में अफ़ग़ानिस्तान में भाषाई, क्षेत्रीय और जातीय भेदभाव व्याप्त हुई है और राष्ट्रीय स्थानों के नाम उन्हीं के आधार पर रखे गए हैं।

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