December 2, 2021

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राजस्थान कांग्रेस में आंतरिक कलह के बीच सीएम गहलोत ने बदला रुख़

अपने चौथे कार्यकाल के दौरान मंत्री के पोर्टफोलियो की घोषणा करने के कुछ दिनों बाद, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना रुख नरम कर लिया है।

 

Ashok Gehlot/twitter

 

शुक्रवार को बीकानेर ज़िले में प्रशाशन गांव के संग” (गाँवों के साथ प्रशासन) शिविर का निरीक्षण करने के दौरे के दौरान, उन्होंने ‘यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि चौथी बार कांग्रेस की सरकार बने’, न कि ‘मुख्यमंत्री कौन बनता है’ के बारे में बात की।

स्वर के इस बदलाव को राजस्थान कांग्रेस में चल रहे राजनीतिक रस्साकशी के नतीजे के रूप में देखा जा रहा है। सीएम गहलोत ने अपने दौरे के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आपने (लोगों ने) मुझे तीसरी बार सीएम बनाया, यह कोई कम बात नहीं है। मैं इसे महसूस करता हूं और स्वीकार करता हूं।”

जब भीड़ में से कोई चिल्लाया, “चौथी बार फिर”, सीएम मुस्कुराए और जवाब दिया, “चौथी बार तो क्या (चौथी बार क्या कहना है)। मैबाप तो आप बैठे हो। (आप अभिभावक / निर्णायक हैं)। फिर उन्होंने कहा कि मकसद यह होना चाहिए कि कांग्रेस चौथी बार सरकार बनाए।

इस बयान से, उनके 2 अक्टूबर को जयपुर में अपने आवास पर इस अभियान के शुभारंभ के दौरान दिए बयान में काफ़ी अंतर है।

उन्होंने कहा था, ”अब मैं लोगों के आशीर्वाद से बिल्कुल ठीक हूं और अगले 15-20 साल तक मुझे कुछ नहीं होगा। अगर कोई कहना चाहता है तो कहे।”

ग़ौरतलब है कि राजस्थान कांग्रेस में एक साल से ज़्यादा समय से आंतरिक संकट चल रहा है और सीएम गहलोत पर विरोधी गुट द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुलझाने का दबाव है। उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार यहां पूरे पांच साल रहने के लिए है और सत्ता में वापस भी आएगी। इसके अलावा उन्होंने ये भी दावा किया कि अभी तक कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा था, ”मैं (शांति) धारीवाल जी को उसी विभाग (शहरी विकास और आवास) का मंत्री बनाऊंगा। मैं आज ही उनके विभाग की घोषणा कर रहा हूं। वह चौथी बार यूडीएच मंत्री होंगे।’

इस बयान से यह धारणा बन गई कि वह अगली कांग्रेस सरकार में भी चौथी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

गहलोत 16 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली में थे, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने का मौक़ा नहीं मिला।

हालांकि राजस्थान के मुद्दों पर चर्चा के लिए राहुल गांधी के आवास पर बैठक हुई थी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी बैठक में थीं। लेकिन राहुल बैठक में शामिल नहीं हो सके थे।

 

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