September 26, 2021

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असम के बीफ़ कंजम्प्शन बिल से मिलेगी साम्प्रदायिक हिंसा रोकने में मदद: हेमंत बिस्वा सरमा

बीफ़ खाने को लेकर असम सरकार ने कहा है कि में मवेशियों की सुरक्षा के कानून (असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021) से इसपर होने वाले हिंसक विवाद को रोका जा सकेगा।

 

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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “हमने इस विधेयक को विधानसभा सत्र के पहले दिन पेश किया था। बीच की अवधि लगभग 30 दिनों की थी। अब हम सभी संशोधनों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। यह वास्तव में एक-दो संशोधन हैं। हालांकि, विपक्ष उनके बारे में उचित तथ्य पेश नहीं कर सका है।”

उन्होंने कहा, “हमारा मवेशी बिल और कुछ नहीं बल्कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के 1950 के बिल में सुधार है।” उन्होंने कहा, “बिल अनुच्छेद 48 और महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित है।”

बता दें कि असम सरकार द्वारा विधेयक को एक प्रवर समिति को भेजने से इनकार करने के विरोध में विपक्षी दलों द्वारा बहिर्गमन के बीच असम विधानसभा ने आज मवेशियों के वध, खपत और परिवहन को विनियमित करने के लिए एक विधेयक पारित कर दिया। स्पीकर बिस्वजीत दैमारी ने असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 को पारित किए जाने की औपचारिक घोषणा की।

इस बिल के अनुसार, “किसी भी मंदिर या मठ के 5 किमी के दायरे में कोई भी पशु वध, उसकी बिक्री या गोमांस की खपत (उपभोग) नहीं हो सकती है। जहां भी पर्याप्त संख्या में हिंदू, जैन, सिख या अन्य गैर-बीफ खाने वाले समुदाय के लोग रहते हैं, वहां बीफ का सेवन नहीं किया जा सकता है।”

यही नहीं अगर खेती के लिए मवेशियों को अंतर-ज़िला आवाजाही की ज़रूरत होती तो उसके लिए सरकार की अनुमति लेना ज़रूरी होव।

सरमा ने कहा, “हमें गांधी जी और अनुच्छेद 48 का पालन करना चाहिए- भोजन की आदत का अधिकार है लेकिन मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक सिद्धांतों के बीच संघर्ष के मामले में, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, नीति निर्देशक सिद्धांत ही मान्य होंगे।”

उन्होंने आगे जोड़ा ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में या उस अवधि के बाद के अधिकांश सांप्रदायिक संघर्ष मूल रूप से गोमांस के आसपास केंद्रित थे। अब अगर किसी गैर-बीफ खाने वाले समुदाय के 5 किमी के भीतर गोमांस खाने वाले व्यक्ति को इसका सेवन करने की अनुमति नहीं होगी, तो कोई संघर्ष भी नहीं होगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तर प्रदेश में गोमांस पर पूर्ण प्रतिबंध है लेकिन असम में हमने गोमांस की बिक्री को विनियमित किया है क्योंकि असम में 36 प्रतिशत लोग इसका सेवन करते हैं।” हालांकि उन्होंने बताया कि, “अन्य उत्तर-पूर्व के राज्यों में मवेशियों या गोमांस की आवाजाही जारी रहेगी, लेकिन मालवाहकों के पास संबंधित राज्य सरकार का परमिट होना चाहिए।”

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