September 26, 2021

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अयोध्या दौरा, कहा – बिना राम के अयोध्या की कल्पना नहीं की जा सकती

राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के बाद 38 साल में पहली बार है कि भारत का कोई राष्ट्रपति राम नगरी अयोध्या पहुंचा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अयोध्या पहुंच गए हैं।

उन्होंने इस दौरान रामायण कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति ने कहा कि बिना राम के अयोध्या नगरी की कल्पना करना भी मुमकिन नहीं है। राम के बिना अयोध्या है ही नहीं। अयोध्या तो वहीं है… जहां प्रभु श्री राम हैं।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी रहे उपस्थित

रामायण कॉन्क्लेव शुभारंभ के दौरान देश की प्रथम महिला नागरिक सविता कोविंद, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे। रामायण कॉन्क्लेव के शुभारंभ समारोह में लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने शानदार अंदाज में गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने जय श्री राम का जय घोष किया और पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

गांधी ने भी श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात किया

राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में प्रभु राम के आदर्शों को महात्मा गांधी ने आत्मसात किया था। वस्तुतः रामायण में वर्णित प्रभु राम का मर्यादा-पुरुषोत्तम रूप प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श का स्रोत है। गांधीजी ने आदर्श भारत की अपनी परिकल्पना को रामराज्य का नाम दिया है। बापू की जीवन-चर्या में राम-नाम का बहुत महत्व था।

पूरी दुनिया में राम लोकप्रिय – राष्ट्रपति

रामकथा की लोकप्रियता भारत में ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी है। उत्तर भारत में गोस्वामीतुलसीदास की रामचरित-मानस, भारत के पूर्वी हिस्से में कृत्तिवास रामायण, दक्षिण में कंबन रामायण जैसे रामकथा के अनेक पठनीय रूप प्रचलित हैं। विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति की जाती है।


इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। भारत ही नहीं विश्व की अनेक लोक-भाषाओं और लोक-संस्कृतियों में रामायण और राम के प्रति सम्मान और प्रेम झलकता है।

राम के बिना अयोध्या की कल्पना ही नहीं

राम के बिना अयोध्या…अयोध्या है ही नहीं। अयोध्या तो वहीं है, जहां राम हैं। इसनगरी में प्रभु राम सदा के लिए विराजमान हैं। इसलिए यह स्थान सही अर्थों में अयोध्या है। अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है, ‘जिसके साथ युद्ध करना असंभव हो’। रघु, दिलीप, अज, दशरथ और राम जैसे रघुवंशी राजाओं के पराक्रम व शक्ति के कारण उनकी राजधानी को अपराजेय माना जाता था। इसलिए इस नगरी का ‘अयोध्या’ नाम सर्वदा सार्थक रहेगा।

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