April 11, 2021

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अपर असम की लड़ाई तय करेगी सरकार

असम में सरकरी वही पार्टी बनाती है जो ऊपरी असम में बेहतर प्रदर्शन करती है। 2016 में बीजेपी ने पूरे असम में अच्छा प्रदर्शन किया। बीजेपी, असम गण परिषद गठबंधन को पूरे राज्य में 126 में 74 सीटें मिली। अगर अपर असम की बातें करें तो यहां की 47 में 35 सीटें एनडीए को मिली थी।

ये वही इलाका है जहां कांग्रेस का 2014 तक दबदबा रहा था। लेकिन फिर कांग्रेस यहां कभी वापसी नहीं कर पाई। इसकी बड़ी वजह चाय बागान कर्मचारियों में कांग्रेस के प्रति नाराज़गी रही। 2019 लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी असम गण परिषद ने इस इलाके में शानदार प्रदर्शन किया। अब इस बार कांग्रेस पूरा ज़ोर अपर असम पर लगा रही है। राहुल गांधी ने रैली की है और वादा किया है अगर कांग्रेस की सरकार बनेगी तो चाय बागान के मजदूरों को 365 रुपये दिहाड़ी दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने 351 रुपये दिहाड़ी का वादा किया था लेकिन मिला सिर्फ 167 रुपये।

राहुल गांधी ने कहा वे झूठ नहीं बोलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी ने असम के चाबुआ में रैली की और कहा कांग्रेस चाय की पहचान मिटाने वालों के साथ है। असम और देश की जनता कांग्रेस को माफ नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस उनके साथ है जो असम की चाय से जुड़ी पहचान को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की रैली में जुटी भीड़ भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ाने वाली है।

दैनिक मज़दूरी में इज़ाफ़ा के वादे के बावजूद कांग्रेस चाय बागान में काम करने वालों के वोटों को अपनी तरफ़ जोड़ पाएगी ये कहना बेहद मुश्किल है। प्रियंका गांधी भी चाय की पत्तियों को तोड़ती हुई नज़र आईं, लेकिन मज़दूरों की कांग्रेस से बढ़ी दूरी इन सबसे कम होगी ऐसा फिलहाल तो नहीं लग रही है।

प्रियंका गांधी भी चाय की पत्तियों को तोड़ती हुई नज़र आईं,

असम के चाय बागान में काम करने वाले ज़्यादातर उत्तर भारत से हैं। दिन भर मेहनत के बावजूद इनकी कमाई बहुत कम है। ये वोटर भी हैं लिहाज़ा चुनाव के वक्त सियासी दलों को इनकी चिंता सताती है

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