November 27, 2021

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चीन को बड़ा झटका: क्लाइमेट समिट में शी जिनपिंग को नहीं मिला वीडियो कॉल पर भाषण देने का मौका, तो लिखे भाषण को ही समिट को सौंपना पड़ा।

चीन से मिली खबर के अनुसार शी जिनपिंग को स्कॉटलैंड में COP26 जलवायु वार्ता के लिए वीडियो संबोधन का मौका नहीं दिया गया। जिसके बाद मजबूरन चीन को एक लिखित प्रतिक्रिया भेजनी पड़ गई।

Credit- REUTERS

आपको बता दें कि इस बार जिनपिंग व्यक्तिगत रूप से यूनाइटेड नेशंस की बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। अपने लिखित बयान में उन्होंने सभी देशों से अपने वादों को निभाने की अपील की है और आपसी भरोसे और सहयोग को मजबूत करने की बात कही है। आगे इस मामले को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि जहां तक मैं इसे समझता हूं, सम्मेलन के आयोजकों ने वीडियो लिंक नहीं दिए।

दरअसल ब्रिटेन ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में COP26 बैठक का आयोजन किया है। जिसका मकसद नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य को पूरा करना है। इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को रोकने के लिए पेरिस समझौते के लक्ष्य को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ोतरी के दायरे में रखने का है। कई मुद्दों को लेकर यह बैठक इन देशों के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

चीन के रवैए से नाखुश एनालिस्ट्स और एक्सपर्ट्स

जलवायु तथा जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने वालें एनालिस्ट्स और एक्सपर्ट्स ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शी जिनपिंग की ग्लासगो से व्यक्तिगत रूप से अनुपस्थिति का मतलब है कि चीन इस दौर की वार्ता के दौरान और रियायतें देने को तैयार नहीं है। हालांकि चीन का दावा है कि वह आने वाले सालों में कोयले पर अंकुश लगाएगा और अपनी सौर और पवन क्षमता को लगातार आगे बढ़ाएगा और जलवायु का संतुलन बनाए रखने में अपना मदद करेगा।

चीन और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंध

चीन और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वार्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। चीन ने लगातार कहा है कि आप एक चीन पर प्रतिबंध लगाकर चीन को कोयला उत्पादन में कटौती के लिए नहीं कह सकते हैं।  इन दोनों देशों के बीच तनातनी विश्व के कई मुद्दों को लेकर पहले भी रुकावट रहा है। चीन के विस्तारवाद और स्वार्थ रूप रवैया को लेकर कई देशों को इससे आपत्ति होती रही है।

 

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