October 26, 2021

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कनाडा में आज से मतदान शुरू, क्या जस्टिन ट्रुडो की होगी सत्ता में वापसी?

कनाडा में सोमवार को होने वाले चुनावों में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सत्ता में एक बार फिर वापसी कर सकते हैं। हालांकि एक मज़बूत अभियान के बाद उनका संसदीय बहुमत हासिल करने का सपना टूटता हुआ दिखाई दे रहा है।

 

Reuters

 

ट्रुडो की सरकार के पास बहुतमत नहीं है इसलिए उन्हें दूसरे राजनीतिक दलों पर किसी फ़ैसले के लिए निर्भर होना पड़ता है। पिछले महीने जनमत सर्वेक्षणों में उन्हें अन्य प्रतिद्वंद्वी नेताओं से काफ़ी आगे बताया गया था। जिसके बाद दो साल पहले ही अपना वोट साधते हुए उन्होंने कहा था कि COVID-19 निपटने के लिए जनता को उनकी वामपंथी लिबरल सरकार की ज़रूरत है।

लेकिन जैसे-जैसे शुरुआती कॉल से लोगों में उनके लिए नाख़ुशी बढ़ती गई, वह अपनी बड़ी बढ़त बनाए रखने में नाकाम रहे।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

उदारवादी रणनीतिकार मानते हैं कि ट्रुडो के लिए हाउस ऑफ़ कॉमन्स की 338 सीटों में से अधिकांश पर जीत हासिल करना कठिन होगा। हाल के दिनों में, 49 साल के ट्रूडो, जिनकी सरकार COVID-19 से लड़ते के दौरान रिकॉर्ड ऋण की रैकिंग में रही – ने सभी को टीका लगाने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया।

वह वैक्सीन जनादेश का समर्थन करते हैं, जबकि 48 वर्षीय कंजर्वेटिव नेता एरिन ओ’टोल रैपिड टेस्टिंग को ज़्यादा प्रभावकारी मानते हैं।

ट्रूडो ने रविवार को ओंटारियो के नियाग्रा फॉल्स में समर्थकों से कहा, “हमें स्पष्ट, मज़बूत नेतृत्व की आवश्यकता है जो साफ़ तौर पर टीकाकरण को आगे बढ़ाए, और यही हम करेंगे। मिस्टर ओ’टोल, ये नहीं कर सकते और नहीं करेंगे।”

अगर ट्रूडो बहुमत हासिल नहीं कर सकेंगे तो ये एक ऐसी हार होगी जो उनके राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल खड़ा कर देगी।

दोबारा सत्ता पर क़ाबिज़ होंगे ट्रुडो?

करिश्माई प्रगतिशील राजनेता जस्टिन ट्रुडो लंबे समय तक रहे पूर्व लिबरल प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो के बेटे हैं जो, 2015 में सत्ता में आए। लेकिन 2019 में ब्लैकफेस में उनकी एक पुरानी तस्वीर के सामने आने के बाद उन्हें बहुमत से हाँथ धोना पड़ा।

पोल दिखाते हैं कि उदारवादी प्रत्यक्ष रूप से रूढ़िवादियों के साथ बंधे हुए हैं, जो एक तरह से ट्रूडो को फ़ायदा पहुँचा सकता है, क्योंकि उदारवादी ताक़त शहरों में हैं जहाँ ज़्यादातर सीटें हैं।

“ऐसी कोई दुनिया नहीं है जहाँ ये बात सही न हो।” एक वरिष्ठ उदारवादी रणनीतिकार ने कहा, “क्या बहुमत संभव है? हां। क्या यह सबसे ज़्यादा संभावित है? नहीं।”

उदारवादी मानते हैं कि चुनावी आह्वान से मतदाताओं को दूर किया जा सकता है। और ऐसे में कम मतदान रूढ़िवादियों के पक्ष में जाता है। मामलों को जटिल बनाने के लिए, दोनों पार्टियों को वोट विभाजन का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रुडो ने रविवार को मॉन्ट्रियल में संवाददाताओं से कहा, “मैं चाहता हूं कि देशभर में अधिक से अधिक लिबरल चुने जाएं क्योंकि हमें एक मज़बूत सरकार की ज़रूरत है।”

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