September 24, 2021

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संसद में हंगामे पर भावुक हुए सभापति वेंकैया नायडू, कहा ‘कभी नहीं सोचा था मेरे सदस्य इस स्तर तक जाएंगे’

सदन के मॉनसून सत्र के दौरान हर रोज़ हंगामें की ख़बरें आ रही हैं। इस बीच राज्य सभा के सभापति एम वेंकैया नायडू विपक्षी सांसदों के हंगामे की बात करते हुए भावुक हो गए और उनका गला भर आया।

 

 

सभापति ने कहा कि बीते दिन कुछ सांसद टेबल पर बैठ गए और कुछ उसपर चढ़ गए जिसके कारण संसद की सारी पवित्रता नष्ट हो गई, इसी के बाद संसद 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।

यही नहीं लोकसभा में भी विपक्षी दलों के सांसद एकजुट होकर केंद्र पर निशाना साध रहे हैं और उन्हें पेगासस, कृषि क़ानून और महँगाई जैसे मुद्दों पर बात करने के लिए कह रहे हैं। इसी कारण बुधवार को भी हंगामा हुआ और अब संसद अनिश्चित काल के लिए रद्द कर दी गई है।

मॉनसून सत्र 13 अगस्त को ख़त्म होना है और सत्र का आख़िरी हफ़्ता है। 19 जुलाई को शुरू हुए इस सत्र में पहले दिन से हंगामा हो रहा है।

बता दें कि विपक्षी सांसदों के इस व्यवहार पर राज्य सभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने 30 जुलाई को भी चिंता जताई थी और कहा था कि इससे सदन की मर्यादा और प्रतिष्ठा गिरी है।

उन्होंने सदन में कहा, “मुझे बताया गया कि कुछ सदस्य सदन में सीटी बजा रहे हैं। वो (शायद) सीटी बजा रहे हैं अपनी पुरानी आदत (की वजह) से। मगर ये सदन है।”

“वहीं कुछ सदस्य मार्शलों के कंधों पर हाथ लगा रहे हैं। मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों किया। और कुछ ने मंत्रियों के सामने तख़्तियाँ लहराईं और उनको देखने नहीं दे रहे थे।”
वेंकैया नायडू ने चेतावनी देने के लहज़े में कहा, “धैर्य की भी एक सीमा होती है और हमें सदन के धैर्य को समाप्त नहीं होने देना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “इससे निबटने का दो ही रास्ता है- या तो इसे नज़रअंदाज़ किया जाए और सदन को बाज़ार बनने दे दिया जाये। हरेक अपनी सीटी बजाते रहे… और दूसरा- कार्रवाई की जाए।”

सभापति ने सदस्यों से शालीनता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “इन सभी चीज़ों से सदन का मान और नीचे गिरा है. मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूँ।”
उन्होंने कहा कि ” मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे सदस्य इस स्तर तक चले जाएँगे।”

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