Monday, September 26, 2022

MOTHER LAND POST

MOTHERLANDPOST

चीन ने कहा अफ़ग़ानिस्तान पर प्रतिबंध लगाना उल्टा साबित होगा

by Disha
0 comment

चीन ने मंगलवार को कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान पर प्रतिबंध लगाना उल्टा साबित होगा और साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देश में सकारात्मक विकास के अवसरों का समर्थन करने का आग्रह किया।

 

Credit- REUTERS

 

‘अफ़ग़ानिस्तान एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है।’ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को इतिहास के सबक से सीखना चाहिए, अफ़ग़ानिस्तान से संबंधित मुद्दों पर विचार करना चाहिए और विवेकपूर्ण तरीके से कार्य करना चाहिए।”

‘प्रतिबंध और हर मोड़ पर दबाव डालने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है, यह केवल उल्टा होगा।’ वांग उन ख़बरों का जवाब दे रहे थे जिनमें कहा गया था कि आगामी G-7 बैठक में विश्व नेता तालिबान पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति के विकास को सकारात्मक दिशा में ले जाना चाहिए, शांतिपूर्ण पुनर्निर्माण का समर्थन करना चाहिए, लोगों की भलाई में सुधार करना चाहिए और स्वतंत्र विकास के लिए अपनी क्षमता को बढ़ाना चाहिए।

वांग ने कहा, ‘हमें अलग-अलग देशों की ग़लती करने को त्रासदी नहीं बनने देना चाहिए, केवल अफ़ग़ान लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से क्षेत्रीय देशों को इसकी भरपाई करनी चाहिए।’

 

Reuters

 

अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीमा साझा करने वाले चीन ने तालिबान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने की मांग की है, और वाशिंगटन की आलोचना की है।
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में तालिबान के सत्ता में आने के बाद चीन और रूस उन कुछ देशों में शामिल हैं जिन्होंने काबुल में अपने दूतावास खुले रखे हैं।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में चीन के दूत चेन जू ने संयुक्त राष्ट्र के एक आपातकालीन सत्र में मंगलवार को कहा कि ‘अमेरिकी सेना और सहयोगियों की सेनाओं को अफ़ग़ानिस्तान में किए गए कथित अधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों को अफ़ग़ानिस्तान में उनकी सेना द्वारा किए गए मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और इस मौजूदा सत्र के विकास में इस मुद्दे को शामिल किया जाना चाहिए।’

चेन ने कहा कि, ‘लोकतंत्र और मानवाधिकारों के बैनर तले अमेरिका और अन्य देश अन्य संप्रभु राज्यों में सैन्य हस्तक्षेप करते हैं और अलग इतिहास और संस्कृति वाले देशों पर अपना मॉडल थोपते हैं। इससे ‘बड़ी पीड़ा’ होती है।’

About Post Author