June 18, 2021

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म्यांमार में लोकतंत्र का संघर्ष तेज़, इंटरनेट पर भी लगा प्रतिबंध

म्यांमार के जून्टा ने शुक्रवार को चिन राज्य के एक कस्बे में एक पुलिस स्टेशन और एक बैंक पर हमले के लिए “सशस्त्र आतंकवादियों” को दोषी ठहराए जाने के बाद मार्शल लॉ घोषित किया है।

सेना बनाम लोकतंत्र

Credit- Reuters

म्यांमार की सर्वोच्च नेता रहीं आंग सान सू की को निर्वाचित करने के बाद से ही सेना व्यापक विरोध का सामना कर रही है। शहरों और सीमावर्ती राज्यों में लड़ाई के बीच जून्टा आदेशों को बनाए रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।

राज्य की म्यांमार समाचार एजेंसी के मुताबिक़ बुधवार और गुरुवार को मिंडत शहर में लगभग 100 लोगों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला करने के लिए घर पर बनाई बंदूकों का इस्तेमाल किया और लगभग 50 लोगों ने म्यांमार इकोनॉमिक बैंक को निशाना बनाया। दावा है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी व्यक्ति को हताहत किए हमले को क़ाबू किया।

क्या सेना ने लगा दिया है मार्शल लॉ?

 

राज्य के अख़बार ‘द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ़ म्यांमार’ द्वारा एक दस्तावेज़ पोस्ट किया गया है जिसमें चीन राज्य में मार्शल लॉ लागू करने की घोषणा हुई है। हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है।

Credit- Reuters

इसने यह भी कहा कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए सात नागरिकों को रिहा करने के वादे को तोड़ने वाली सेना द्वारा लड़ाई शुरू की गई थी।

चिनलैंड डिफेंस फ़ोर्स के एक प्रवक्ता, एक नवगठित मिलिशिया, ने इस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता की पुष्टि की है। “वे (जून्टा) अब कुछ क्षेत्रों को छोड़कर जहाँ उनकी पकड़ है, पूरे शहर पर शासन नहीं कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनका कोई नियंत्रण नहीं है।”

 

प्रदर्शन और नए संगठनों का उदय

 

सोशल मीडिया पर वीडियो में लोकतंत्र समर्थकों को “हम मानते हैं कि हम जीतेंगे, हमें जीतना चाहिए, हमें जीतना चाहिए” के नारे लगाते हुए दिखाया जा सकता है।

Credit- Reuters

सेना ने मीडिया, इंटरनेट सेवाओं और उपग्रह प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। 1 फरवरी के तख्तापलट के बाद से कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में लड़ाई तेज़ हो गई है, जिसमें जातीय मिलिशिया ने हमले तेज़ कर दिए हैं, सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है और एक सैन्य हेलीकॉप्टर को गिरा दिया है।

इस संघर्ष में कई संगठनों का गठन भी हुआ है जो लोकतंत्र की चाह लिए म्यांमार की सेना के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं। हालाँकि इस संघर्ष में और कितनों की जान जाएगी और यह कब सफल होगा, यह तो समय जी बताएगा।

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