October 26, 2021

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पेगासस मामले की जाँच के लिए गठित होगी एक्सपर्ट कमिटी, चीफ़ जस्टिस एनवी रमना ने किया ऐलान

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस एनवी रमना ने गुरुवार को कहा कि वे पेगासस मामले की जाँच के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी के गठन करने जा रहे हैं।

 

Credit- LivLaw

 

बता दें कि पेगासस स्पाइवेयर इसराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी NSO द्वारा तैयार किया गया है। इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल कई देश करते हैं।

भारत सरकार पर ये आरोप है कि वो इसका इस्तेमाल पत्रकारों और चर्चित हस्तियों के फ़ोन में जासूसी करने के लिए कर रही थी। अब यही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

इस बाबत सुनवाई करते हुए आज CJI एनवी रमना ने कहा कि कोर्ट जिन लोगों को टेक्निकल कमिटी का हिस्सा बनाना चाहते हैं वे व्यक्तिगत कारणों से ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक्सपर्ट व्यक्तियों के उपलब्ध न होने के कारण काफ़ी दिक्कत हो रही है।

 

क्या है पेगासस और कैसे करता है काम?

पेगासस इसराइल की NSO ग्रुप टेक्नोलॉजीज़ द्वारा बनाया गया है। ये एक इस तरह का प्रोग्राम है जो अगर किसी के फ़ोन में डाल दिया जाए तो वह उसके फ़ोन कॉल, मैसेज, ईमेल, लोकेशन, कैमरा, ऑडियो और माइक्रोफ़ोन जैसी सभी चीज़ों की जानकारी हासिल कर सकता है।

समाचार एजेंसी बीबीसी साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई के हवाले से लिखता है, “पेगासस आपको एन्क्रिप्टेड ऑडियो सुनने और एन्क्रिप्टेड संदेशों को पढ़ने लायक बना देता है।
एन्क्रिप्टेड ऐसे संदेश होते हैं जिसकी जानकारी सिर्फ़ मेसेज भेजने वाले और रिसीव करने वाले को होती है। जिस कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म पर मेसेज भेजा जा रहा है, वो भी उसे देख या सुन नहीं सकती।”

इस तरह ये साफ़ हो जाता है कि इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करके हैक करने वाले को उस व्यक्ति के फ़ोन से जुड़ी सब जानकारी मिल सकती है।

हालांकि इस सबके बीच NSO कंपनी हमेशा से दावा करती रही है कि ये प्रोग्राम वो केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है और इसका उद्देश्य “आतंकवाद और अपराध के ख़िलाफ़ लड़ना” है।

NSO कंपनी ने कैलिफ़ोर्निया की अदालत में ये बात कही थी कि वह अपने स्पाइवेयर का इस्तेमाल ख़ुद कभी नहीं करती बल्कि केवल संप्रभु सरकारें करती हैं।

 

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