Saturday, October 1, 2022

MOTHER LAND POST

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‘मिस्टर मोदी, आकर हमारी बात सुनिए’ नारे से गूँजा सदन, विपक्षी दलों ने बोला केंद्र पर हमला

by Disha
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संसद का मॉनसून सत्र हंगामें की भेंट चढ़ता नज़र आ रहा है और जो माँग विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री मोदी से की है उसका नारा ‘मिस्टर मोदी, आकर हमारी बात सुनिए’ अब सदन में गूँज रहा है।

 

 

यह संसद के मॉनसून सत्र का आख़िरी हफ़्ता है और ऐसे में विपक्षी पार्टियाँ एकजुट होकर पेगासस जासूसी और कृषि क़ानून समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की माँग कर रही हैं।
राज्यसभा में विपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़ने ने इस मद्देनज़र ट्विटर पर तीन मिनट का एक वीडियो शेयर किया है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि सदन में अलग-अलग पार्टियों के नेता की मुद्दों पर अपना विरोध जता रहे हैं। इस वीडियो को ट्वीट करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा है, “ऐसा लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डर गए हैं। वो संसद में सवालों के जवाब क्यों नहीं देना चाहते हैं? विपक्षी पार्टियाँ संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन बीजेपी सरकार कार्यवाही ठप कर रही है ताकि सच लोगों तक न पहुँचे।”

इस वीडियो में कई विपक्षी नेता अपनी बात कहते नज़र आ रहे हैं। जैसे-

 

 

जिस चर्चा के लिए हम 15 दिन से तड़प रहे हैं, आप उसकी इजाज़त नहीं दे रहे हैं और जिसको हम बाद में कर सकते हैं, वो बिल लाकर आप पास कर रहे हैं।- (मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस)

“राष्ट्र की सुरक्षा के नाम पर जो ज़हर घोला जा रहा है-पेगासस। एक ऐसा उपकरण जो सबके घर तक पहुँचा दिया गया है। आज इस सदन में लोकतंत्र ख़तरे में है। हम क़ानून की गुणवत्ता पर बात करें, इससे पहले हमें लोकतंत्र की गुणवत्ता पर बात करनी होगी।”- (आरएस भारती, डीएमके)

हमारे देश में जनता की हालत बहुत ख़राब है। किसान, मज़दूर, औरत….नौ साल की बच्ची को रेप करके मार दिया।”(झरना दास वैद्य, सीपीआईएम)

संसद में अभिव्यक्ति की आज़ादी होगी।-(सुखेंदु शेखर रॉय, टीएमसी)

बता दें कि संसद के इस मॉनसून सत्र में प्रधानमंत्री मोदी सिर्फ़ एक बार नए मंत्रियों का परिचय देने के लिए ही आये थे। इस दौरान सदन में काफ़ी हंगामा हुआ था जिस पर प्रधानमंत्री ने अपनी नाराज़गी जताई थी।

 

 

ग़ौरतलब है कि हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार मॉनसून सत्र में संसद में रोज़-रोज़ हंगामा होने के कारण उसकी कार्यवाही बाधित हुई है और इसी वजह से देश के करदाताओं का 133 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुक़सान हुआ है।

इस हंगामे के कारण अब तक संसद तय 107 घंटों में से महज 18 घंटे ही चल पाई है। इन हंगामों में विपक्षी दलों ने सरकार पर चर्चा, बहस और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है तो सरकार ने विपक्षी पार्टियों पर सदन न चलने देने का दोषारोपण किया है। संसद का यह मॉनसून सत्र 19 जुलाई से शुरू हुआ था जो 13 अगस्त तक चलेगा।

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