October 24, 2021

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क्या यूपी चुनावों में कांग्रेस और सपा एक बार फिर चलेगी गठबंधन की राह?

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले हाथ मिलाने के बाद, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) 2022 के उत्तर प्रदेश चुनावों में एक बार फिर गठबंधन कर सकती है। ये क़यास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने पंजाब में एक दलित नेता को मुख्यमंत्री पद पर आसीन किया है।

 

अखिलेश यादव और राहुल गांधी/Ndtv

 

कांग्रेस पार्टी को लगता है कि पंजाब में कांग्रेस के दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी के पंजाब के नए सीएम के रूप में शपथ लेने से जैसे मास्टरस्ट्रोक के बाद अब उसके उत्तर प्रदेश के 2022 के विधानसभा चुनाव जीतने की प्रबल संभावना है।

मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी की नियुक्ति को न केवल पंजाब की राजनीति में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है, बल्कि देशभर के अन्य राज्यों पर इसका व्यापक असर पड़ने की भी संभावना है।

समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने चन्नी को सीएम बनाए जाने का स्वागत किया है। हाल ही में कांग्रेस द्वारा दलित मुख्यमंत्री चुनने से पहले, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद के साथ हुई बैठक में बनाई गई रणनीति का हिस्सा थीं।

 

दलितों पर दाँव

यह राजनीतिक घटनाक्रम सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सामाजिक सम्मेलनों और दलित आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से ब्राह्मणों और दलितों को लुभाने की बात के बीच आया है।

समाजवादी लोहिया वाहिनी ने 19 सितंबर से उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में “गांव से गांव दलित संवाद” कार्यक्रम शुरू किया है। आने वाले दिनों में प्रियंका गांधी 29 सितंबर से 23 अक्टूबर तक चुनावी रैलियां करेंगी और चुनावी क्षेत्रों का दौरा करेंगी।
माना जा रहा है कि इस दौरान सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन बनाने की बात साफ़ हो जाएगी।

 

 

बता दें कि सपा नेता अखिलेश यादव 2022 का उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के लिए एक नया राजनीतिक नारा ‘नई हवा है, नई एसपी है’ लेकर आए हैं। इस नारे के साथ अखिलेश ने MY (मुस्लिम-यादव) जातिगत समीकरणों से किनारा कर लिया है और इसे ‘महिला’ और ‘युथ’ नाम दिया है।

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