October 26, 2021

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ग्रेटर नोएडा में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण को लेकर हुआ विवाद, जाने क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 21 सितंबर को ग्रेटर नोएडा आने वाले हैं। योगी आदित्यनाथ 22 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के दादरी में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसको लेकर अब ठाकुरों और गुर्जर समाज के बीच अनबन हो गई है। 

क्या है विवाद

दरअसल, सम्राट मिहिर भोज को लेकर ठाकुर जाति और गुर्जर जाति में हमेशा विवाद रहता है। मिहिर भोज को गुर्जर अपना पूर्वज बताते हैं और ठाकुर भी सम्राट मिहिर भोज को अपना पूर्वज बताते हैं। ग्रेटर नोएडा के दादरी में योगी आदित्यनाथ 22 सितंबर को जिस मूर्ति का अनावरण करने वाले हैं। वह सम्राट मिहिर भोज गुर्जर के नाम से है। इसलिए करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश रघुवंशी ने योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है की , वह दादरी में सम्राट मिहिर भोज गुर्जर की मूर्ति का अनावरण करने ना आए। अगर ऐसा हुआ तो ठाकुर समाज उनके खिलाफ चला जाएगा।  इसका हर्जाना चुनाव मे भुगतना होगा ।

करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश रघुवंशी ने बताया कि 22 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा है और उस सभा में गुर्जर लोग इतिहास के साथ छेड़छाड़ करके क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार की प्रतिमा का अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करवाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध है कि आपको दादरी में अपनी सभा का कार्यक्रम तो करना चाहिए। लेकिन महापुरुषों की जाति के साथ छेड़छाड़ कर, मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में भाग नहीं लेना चाहिए। गुर्जरों द्वारा बिना ऐतिहासिक तथ्यों के ही मनमाने रूप से महापुरुषों की जाति बदलना असंवैधानिक एवं गैरकानूनी है। किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विधायक को ऐसी मूर्तियों का अनावरण नहीं करना चाहिए। जिसमें कि किसी महापुरुष की जाति के साथ छेड़छाड़ की गई हो।

उन्होंने कहा कि गुर्जरों द्वारा कई महापुरुषों की जाति बदलने का असंवैधानिक एवं गैर कानूनी अभियान चलाया जा रहा है। यदि गुर्जरों के इस असंवैधानिक एवं गैरकानूनी अभियान में किसी राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी सहयोग करते हैं। तो भविष्य में इस तरह की गलत परंपरा पड़ेगी और गुर्जरों को कई अन्य महापुरुषों की जाति बदलने के अभियान को बढ़ावा ही मिलेगा। लेकिन गुर्जर लोग संविधान की अवहेलना करते हुए मनमाने रूप से महापुरुषों की जातियां बदलकर मूर्ति स्थापना कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

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