September 28, 2021

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ज़ाइडस कैडिला वैक्सीन को मिली भारत में आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी, जानें क्या है दुनियां की पहली प्लाज्मिड DNA वैक्सीन की ख़ासियत

ZyCoV-D, अहमदाबाद स्थित फ़ार्मास्युटिकल फ़र्म कैडिला हेल्थकेयर (Zydus Cadila) द्वारा तीन-खुराक वाले कोविड -19 वैक्सीन को शुक्रवार को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए मंज़ूरी मिल गई और इसे 12 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को दिया जाएगा।

 

Reuters

 

सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने कहा कि ‘प्लग-एंड-प्ले’ तकनीक जिस पर प्लास्मिड डीएनए प्लेटफॉर्म आधारित है, को वायरस में म्यूटेशन से निपटने के लिए आसानी से अनुकूलित किया जा सकता है।

“ZyCoV-D के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (DCGI) से आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (ईयूए) की मंज़ूरी आज यानी शुक्रवार को मिली जो दुनिया की पहली और भारत की स्वदेशी रूप से विकसित COVID-19 के लिए डीएनए आधारित सिने को इंसानों को लगाया जाएगा। इसमें 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चे और वयस्क शामिल हैं।” रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ड्रग रेगुलेटर ने जाइडस को कोरोनावायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ अपने टीके की दो-डोज़ वाली खुराक के लिए अतिरिक्त डेटा जमा करने को कहा है।

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के बाद Zydus Cadila का दूसरा स्वदेशी टीका बन गया है जिसे भारत में आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिली है। Zydus Cadila ने ये भी कहा था कि वो मंज़ूरी मिलने के दो महीने के भीतर अपनी ख़ुराक़ वाली प्लास्मिड डीएनए कोविड -19 वैक्सीन लॉन्च करेगा।

ZyCoV-D वैक्सीन के बारे में कुछ ज़रूरी बातें-

• ZyCov-D SARS-CoV-2 संक्रमण के ख़िलाफ़ मानव उपयोग के लिए दुनिया का पहला प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन बन गया है।

• अधिकांश अन्य कोरोनावायरस टीकों के विपरीत, जिन्हें पूर्ण प्रतिरक्षा के लिए दो खुराक की आवश्यकता होती है, ZyCoV-D को तीन खुराक में दिया जाएगा।

• जायडस का दावा है कि इसका टीका कोरोना वायरस के लक्षण वाले मामलों में 66.6 फ़ीसद और मध्यम कोविड-19 के लिए 100 फ़ीसद प्रभावी है। दावा यह भी है कि यह टीका 12 से 18 साल के बच्चों के लिए भी सुरक्षित है।

• फ़र्म ने देशभर में 28 हज़ार से अधिक वॉलंटियर्स के अंतिम चरण के परीक्षण में 66.6% की प्रभावकारिता दर के आधार पर 1 जुलाई को ZyCoV-D वैक्सीन के प्राधिकरण के लिए आवेदन किया था।

• ZyCov-D, जिसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ साझेदारी में विकसित किया जा रहा है, को 2-8 डिग्री सेल्सियस और 25 डिग्री सेल्सियस पर तीन महीने तक स्टोर किया जा सकता है।

• यह एक अंतर-त्वचीय (त्वचा और मांसपेशियों के बीच) टीका होगा जिसे एक विशेष सुई-मुक्त इंजेक्टर के माध्यम से लगाया जाएगा। वर्तमान में लाइसेंस प्राप्त कोरोनावायरस टीकों को इंट्रा-मस्कुलर रूप से लगाया है।

ZyCoV-D भारत का पहला डीएनए प्लास्मिड वैक्सीन है जिसे अहमदाबाद के वैक्सीन टेक्नोलॉजी सेंटर में विकसित किया गया है।

• एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जाइडस समूह के अध्यक्ष पंकज आर पटेल ने दिसंबर 2020 में कहा था कि परीक्षण के पहले दो चरणों से पता चला है कि टीका ‘सुरक्षित और प्रतिरक्षात्मक’ है।

 

डीएनए प्लास्मिड वैक्सीन क्या है?

बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएनए प्लास्मिड एक अपेक्षाकृत नई वैक्सीन तकनीक है और इसे स्केलिंग के लिए लागत प्रभावी भी माना जाता है। कोशिकाओं के क्रोमोज़ोम्स में DNA होते हैं और क्रोमोज़ोम्स के बाहर भी DNA प्लास्मिड नामक रूप में होते हैं। यह आनुवंशिक रूप से इंजीनियर्ड प्लास्मिड को इंजेक्ट करके काम करता है जो शरीर को वायरस से बचाने के लिए एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए ट्रिगर करता है।

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