May 13, 2021

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डेनमार्क की सरकार ने लगाई ऑक्सफ़र्ड की एस्ट्राज़ेनेका पर स्थाई रोक

डेनमार्क ने मंगलवार को ऐलान किया कि वह ऑक्सफ़ोर्ड की एस्ट्राज़ेनेका पर स्थाई तौर पर रोक लगा रहा है। ऐसा करना वाला डेनमार्क यूरोप का पहला देश बन गया है।

यह रोक वैक्सीन इस्तेमाल करने वालों में ख़ून के थक्के जमने की शिक़ायत की बिनाह पर लिया गया है जिसके मामले दुर्लभ हैं।
बताया जा रहा है कि इस क़दम से डेनमार्क में चल रहा टिकाकरण कई हफ़्तों के लिए प्रभावित होगा।

क्या है पूरा मामला?

यूरोप में दवाओं पर नज़र रखने वाली संस्था ‘यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी’ ने बीते सप्ताह कहा था कि यह संभव है कि ख़ून के थक्के जमने का संबंध वैक्सीन से हो सकता है।
हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि इसकी तुलना में कोरोना से मौत का ख़तरा कहीं ज़्यादा है।
यह पहली बार नहीं है कि इस वैक्सीन पर किसी देश ने रोक लगाई है। इसके पहले भी कई यूरोपीय देशों ने इसके इस्तेमाल पर सन्देह जताते हुए अस्थाई तौर पर एस्ट्राज़ेनेका पर रोक लगा दी थी।
हालांकि यूरोपियन मेडिसिन्‍स एजेंसी (EMA) की ओर से वैक्सीन को सुरक्षित बताए जाने के बाद इसका इस्तेमाल फिर से शुरू हो गया था पर इन देशों में डेनमार्क शमिल नहीं था।

अन्य देशों में लग रही है एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन?

ज़्यादातर यूरोपीय देश इस वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहे हैं और ये लोगों को लगाई जा रही है। हालाँकि बुर्ज़ुर्गों के लिए इसके प्रयोग पर कुछ बंदिशें लगाई गई हैं।
दूसरी ओर मंगलवार को कनाडा, अमेरिका और यूरोपीयन यूनियन ने जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को भी इन्हीं कारण से रोक दिया है।
यही कारण है कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को अफ़्रीका में भी लाल झंडी दिखाई गई है। ग़ौरतलब है कि यह वैक्सीन दक्षिण अफ़्रीकी वेरिएंट पर असरदार थी और यह अफ़्रीका की पसंदीदा वैक्सीन भी बताई जाती है। बावजूद इसके ये रोक लगाई गई है।
इन दोनों वैक्सीन पर समाचार एजेंसी बीबीसी ने लिखा, “एस्ट्राज़ेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के दुष्प्रभाव से ख़ून के थक्के जमने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। दोनों ही वैक्सीन एक ही तरीके से काम करती हैं जिसे एडेनोवायरल वैक्टर कहा जाता है।”

डेनमार्क क्यों रोक रहा है एस्ट्राज़ेनेका का इस्तेमाल?

डेनमार्क के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार एक शोध से पता चला है कि ‘एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन लेने से ख़ून के थक्के जमने के मामले अनुमान से ज़्यादा सामने आ रहे हैं। इससे हर चालीस हज़ार में से एक व्यक्ति प्रभावित हो रहा है।’
AFP के मुताबिक़ एक रिपोर्ट में डेनमार्क में ख़ून के थक्के जमने के दो मामलों में वैक्सीन कारण बनकर उभर रही है। इनमें से एक महिला की मृत्यु भी हो गयी है।
महानिदेश सोरेन ब्रोस्ट्रोम ने अपने एक बयान में कहा है कि ये फ़ैसला लेना बेहद मुश्क़िल है लेकिन फ़िलहाल यह फ़ैसला किया जा रहा है क्योंकि डेनमार्क के पास वैक्सीन के अन्य बेहतर विकल्प मौजूद हैं और यहाँ महामारी की स्थिति नियंत्रित में है।
उन्होंने जोड़ा कि अब डेनमार्क में जिन लोगों को वैक्सीन लगेगी उनका संक्रमित होना मुश्क़िल है।
हालाँकि बहुत से अधिकारियों का ये भी मानना है कि एस्ट्राज़ेनेका के दोबारा इस्तेमाल होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
बता दें कि यहाँ फ़ाइजर बायोनटेक और मोडर्ना की वैक्सीन उपयोग में लाई जा रही है।
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