December 2, 2021

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अफ़ग़ानिस्तान: काबुल के अस्पताल में हुए भयानक विस्फ़ोट में 25 लोगों की दर्दनाक मौत, 50 से ज़्यादा घायल

अधिकारियों ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के सबसे बड़े सैन्य अस्पताल पर मंगलवार को हुए हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए और 50 से अधिक घायल हो गए। इस हमले में दो भारी विस्फ़ोट हुए, जिसके बाद मध्य काबुल में बंदूकधारियों ने साइट पर हमला कर दिया।

 

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तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा कि विस्फ़ोट 400 बिस्तरों वाले सरदार मोहम्मद दाऊद खान अस्पताल के प्रवेश द्वार पर हुए और इसके तुरंत बाद बंदूकधारियों के एक समूह ने हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि तालिबान सुरक्षा बलों ने चार हमलावरों को मार गिराया और पांचवें को पकड़ लिया।

 

क्यों हुआ ये हमला?

बता दें कि तालिबान ने अगस्त में पश्चिम समर्थित सरकार पर अपनी जीत हासिल कर ली और समूचे देश पर कब्ज़ा कर लिया।

फ़िलहाल इस हमले की ज़िम्मेदारी को लेकर कोई दावा नहीं किया गया है लेकिन इसे ऑपरेशन इस्लामिक स्टेट द्वारा किया गया हमला माना जा रहा।

 

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इससे पहले भी ये समूह कई बार बमबारी कर चुका है और तालिबान के क़ब्ज़े के बाद ये कट्टरपंथी सरकार के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बनकर उभर रहा है।

तालिबान के एक सुरक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं और 50 से अधिक घायल हुए हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर हताहतों की संख्या की पुष्टि अबतक नहीं हुई है।

 

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निवासियों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में शहर के वज़ीर अकबर खान क्षेत्र में विस्फ़ोट के बाद धुएं का ग़ुबार देखा जा रहा है। चश्मदीदों ने कहा है कि हमले के दौरान कम से कम दो हेलीकॉप्टरों ने क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरी।

अस्पताल का एक स्वास्थ्य कर्मी, जो भागने में सफल रहा, ने कहा कि उसने एक बड़े विस्फ़ोट की आवाज़ सुनी जिसके बाद कुछ मिनटों तक गोलियां चलीं। उन्होंने बताया कि क़रीब दस मिनट बाद दूसरा धमाका हुआ। उसने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि विस्फ़ोट और गोलियां अस्पताल परिसर के अंदर थीं या नहीं।

 

विभत्स हमले के पीछे किसका हाँथ?

इस्लामिक स्टेट, जिसने अगस्त में काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से मस्जिदों और अन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं, ने 2017 में अस्पताल पर एक भयानक हमला किया था जिसमें 30 से ज़्यादा लोग मारे गए थे।

 

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इस समूह के हमलों ने अफ़ग़ानिस्तान के बाहर बढ़ती चिंताओं को जन्म दिया है क्योंकि तालिबान के उदय के बाद देश में आतंकवादी समूहों के लिए आश्रय बनने की आशंका बढ़ गई है।

ग़ौरतलब है कि बढ़ते आर्थिक संकट से चिंता और बढ़ गई है, जिसने सर्दियों के क़रीब आने के साथ ही लाखों लोगों को ग़रीबी के ख़तरे में डाल दिया है और हज़ारों लोगों को बेरोज़गार होने पर मजबूर कर दिया है।

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