September 27, 2021

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इलाहाबाद हाईकोर्ट से डॉ. कफ़ील खान को मिली राहत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), अलीगढ़ द्वारा डॉ कफील खान के ख़िलाफ़ पास किये गए चार्जशीट और उसके संज्ञान आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि डॉ. खान ने नागरिकता संशोधन के विरोध में एक भड़काऊ भाषण दिया था।

 

ANI

 

अदालत ने चार्जशीट और उसके संज्ञान आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि आरोप पत्र दाखिल करने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारियों ने केंद्र या राज्य सरकार या ज़िला मजिस्ट्रेट से क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 196 (ए) के तहत अपेक्षित मंज़ूरी नहीं ली थी जो ऐसे मामलों में ज़रूरी होती है।

हालांकि, यह फ़ैसला देते हुए जस्टिस गौतम चौधरी ने स्पष्ट किया कि केंद्र या राज्य सरकार या ज़िले से सीआरपीसी की धारा 196 (ए) के तहत दी गई अनिवार्य मंज़ूरी के बाद अदालत द्वारा चार्जशीट और उसके संज्ञान आदेश पर विचार किया जा सकता है।

सीआरपीसी की धारा 196 (ए) के अनुसार, केंद्र या राज्य सरकार या ज़िला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंज़ूरी के बिना कोई भी अदालत आईपीसी की धारा 153 ए के तहत किसी भी अपराध का संज्ञान नहीं लेगी।

बता दें कि इससे पहले, डॉ खान के खिलाफ़ धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153 बी (आरोप, राष्ट्रीय एकता के लिए पूर्वाग्रही दावे), 505 (2) (बयान बनाने या बढ़ावा देने, दुश्मनी, घृणा या दुर्भावना को बढ़ावा देने के तहत) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

ग़ौरतलब है कि सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान 12 दिसंबर, 2019 को एएमयू में डॉ. कफ़ील खान के भाषण के बाद उनपर भारतीय दंड संहिता की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना) लगाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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