April 11, 2021

MotherlandPost

Truth Always Wins!

अब बस भी करो वादों का..कितना रुलाओगे

 नमस्कार चुनावी चुनावी चिकचिक में आपका स्वागत है। इस बार थोड़ा विलंब हो गया इसके लिए माफ़ी चाहते हैं। क्या करें चुनाव के खुमार में होली का खुमार मिस नहीं करना चाहते थे बस। चलिए मेरी छोड़िए नेता जी के बारे में बात करें।
जिन राज्यों में चुनाव है वहां कोरोना गायब है। रैलियों, रोड शो में इतनी भीड़ उमड़ती है उससे तो ऐसा लगता है लॉकडाउन में जितने दिन घर में बंद रहना पड़ा है वो सारी कसर चुनाव में ही जनता पूरी करना चाहती है। वैसे भी दो ग़ज़ दूरी, मास्क है ज़रुरी, इसका पालन चुनाव में कहां होता है।
बिहार से लेकर बंगाल, तमिलनाडु से लेकर असम सब जगह एक ही हाल है। कोरोना को इतनी चुनौती तो दुनिया में कहीं नहीं मिली होगी। नेताजी को चुनाव जीतना है और जनता के जितवाना है इसलिए कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। लाइफ़ पर रिस्क चलेगा लेकिन सीट पर रिस्क का तो सवाल ही नहीं है।
अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर। मुझे अफ़सोस है कि मैं मदुरै दक्षिण का वोटर क्यों नहीं हूं। सोचिए अगर होता और निर्दलीय उम्मीदवार सर्वानन जीत जाते तो सीधा लोअर मिडिल क्लास से हाई क्लास सोसायटी में आ जाता। मेरा सपना मनी मनी पूरा हो जाता । सर्वानन भाई ने क्या क्या नहीं देने का वादा किया है। हां ये इसलिए बोल रहा हूं कि उन्हें जो वोट देंगे वो यही सोच रहे हैं कि मुझे क्या क्या नहीं मिलेगा, क्योंकि सर्वानन साहब ने सबकुछ देने का वादा कर दिया है।
हालत तो ऐसी लग रही है कि कोई आकर पूछ बैठेगा..मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, तुम्हारे पास क्या है। जवाब होगा मेरे पास सर्वानन हैं। जो अगर जीत गए तो मिनी हेलीकॉप्टर देंगे, इससे भी मन नहीं पिघलाते तो और भी सुन लीजिए क्या क्या मिलेगा। तीन मंज़िला मकान, शादी पर सोने के जेवर, हर घर में रोबोट जो महिलाओं की मदद करेंगे। वैसे पुरुष भी खूब खाना बनाते हैं। लिहाज़ा रोबोट उनके भी काम आएगा। मदुरै की गर्मी से बचाने के लिए 300 फुट का साहब आर्टिफिशियल बर्फ़ का पहाड़ भी बनवा देंगे।
अगर अभी भी निर्णय नहीं ले पा रहे तो भैया मून के सफ़र के लिए टिकट भी देंगे। सर्वानन भाई बस भी कीजिए, अब इससे ज़्यादा तो कोई नहीं कर सकता। लेकिन इतना सब देने का पैसा कहां से आएगा?अगर ये सोच रहे हैं तो आप बायस्ड हैं। काहे बोल रहे हैं तो बता देते हैं। इसलिए कि ये सवाल कभी बड़े दलों से किया है? क्या सर्वानन जी निर्दलीय हैं तो उन्हें इतने मुश्किल सवाल से गुज़रना पड़ेगा? बिल्कुल हरगिज़ नहीं हम होने देंगे।
वैसे सर्वानन जी ने स्पष्ट किया है कि उनका मकसद जनता की आंखें खोलना है, जिससे वो सही उम्मीदवार चुनें ना कि मुफ़्त के चक्कर में किसी को भी। वाह सर्वानन जी मान गए। आपने ग़ज़ब संदेश देने का तरीका ढूंढ़ा है। बात तो सही है वोट उसी को देना जो दिखे पांच साल, वरना जीत के बाद हमने देखे हैं कई नेताओं को होते फ़रार। एक्सपीरियंस से बता रहे हैं हम। मानना है तो मानिए नहीं तो फिर नेता जी के तलाशी का पोस्टर चिपकाते घुमिएगा।
चलिए आज के चुनावी चुनावी चिकचिक को करते हैं समाप्त। इस बार जल्द मिलेंगें करते रहेंगे चुनावी मौसम में आपके दिल की  बात। पसंद आए तो शेयर कर दीजिएगा। क्योंकि व्यूज़ नहीं बढ़ा तो एडिटर साहब लिखने का छीन लेंगे अधिकार। नमस्कार
Translate »