June 18, 2021

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इज़राइल को लेकर अर्दोआन ने बढ़ाया पाकिस्तान और रूस की ओर दोस्ती का हाँथ

इज़राइल और फ़िलिस्तीनियों के बीच जारी टकराव की बाबत तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन दुनियाँभर के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर रहे हैं। अर्दोआन ज़्यादातर इस्लामिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर उन्हें अपने पाले में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

रूस का रुख़

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इसी कड़ी में बुधवार को उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात की। पुतिन से फ़ोन पर इस बातचीत में अर्दोआन ने कहा कि इज़राइल को कड़ा सबक सिखाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जबतक यह संघर्ष और मामला किसी समाधान की ओर नहीं जाता तबतक वे अपनी पहल जारी रखेंगे। अर्दोआन ने पुतिन से कहा कि फ़िलिस्तीनियों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी भेजी जानी चाहिए और यही नहीं इस पूरे मामले में तुर्की और रूस को यूएन में साथ मिलकर काम भी करना चाहिए।

पाकिस्तान और तुर्की की जुगलबंदी

Credit- Getty Images

 

अर्दोआन ने पुतिन से बातचीत के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से भी फ़ोन पर बात की, यह बात भी इज़राइल के मौजूदा हालात पर ही केंद्रित थी।
पाकिस्तान के पीएमओ की ओर से कहा गया है कि दोनों देशों ने इज़राइल की समस्या पर बात की और एकजुटता भी ज़ाहिर की। दोनों देशों के नेताओं ने कहा कि ‘रमज़ान के पवित्र महीने में यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद के भीतर नामज़ियों पर हमला जघन्य अपराध है और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है।’
इस बातचीत का परिमाण यह रहा कि दोनों नेताओं के बीच विदेश मंत्रियों के साथ मिलकर इस मसले पर साथ काम करने की सहमति बनी और अब ये दोनों देश फ़िलिस्तीनियों के मद्दों को लेकर साथ काम करेंगे।

सुरक्षा मामलों पर साथ करेंगे काम

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार दोनों देशों के नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी बात हुई। तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने ये भी कहा है कि पाकिस्तान और तुर्की के संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मायने रखते हैं।
Credit- University of Colorado Boulder
अर्दोआन ने अपने बयान में कहा, ”अल अक़्सा मस्जिद और मुसलमानों पर हमला तत्काल रोका जाएगा। इसराइल की कार्रवाई मानवता पर हमला है और यह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है। अगर इन हमलों को नहीं रोका गया तो इस पृथ्वी पर एक भी व्यक्ति नहीं होगा, जिसका अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नियमों पर भरोसा रह जाएगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इसराइली कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाए। यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल को सोचना होगा कि यह दुनिया पाँच देशों से आगे भी है।”
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