June 18, 2021

MotherlandPost

Truth Always Wins!

मंगोलिया के पूर्व प्रधानमंत्री खुरेलसुख ने पड़े पैमाने पर जीता राष्ट्रपति पद का चुनाव

मंगोलिया के पूर्व प्रधानमंत्री उखना खुरेलसुख बुधवार को देश के छठे लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति बने, जिसने सत्तारूढ़ मंगोलियाई पीपुल्स पार्टी (एमपीपी) की सत्ता को एक शानदार जीत के साथ और मज़बूत किया।

 

उखना खुरेलसुख/Reuters

 

आम चुनाव समिति ने कहा कि खुरेलसुख, जिन्हें इस साल की शुरुआत में विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री के रूप में इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया था, ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सोदनोमज़ुंडुई एर्डिन और राइट पर्सन इलेक्टोरल गठबंधन के डांगासुरेन एनखबत को चुनावों में हरा दिया है।

 

सोदनोमज़ुंडुई एर्डिन/Al-Jazeera

 

रातों-रात 99.7 फ़ीसद मतों के साथ, खुरेलसुख के वोटों की संख्या 821,136 या कहें कुल के 68 फ़ीसद हिस्से तक पहुँच गई थी। इस वोट शेयर की महत्ता इसलिए भी है कि 1990 में लोकतांत्रिक युग शुरू होने के बाद से अबतक यह वोटों का सबसे बड़ा हिस्सा है।
एनखबत 242,805 मतों (20.1 फ़ीसद) के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि एर्डिन 72,569 (6 फ़ीसद) वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

 

डांगासुरेन एनखबत/Al-Jazeera

 

खुरेलसुख की जीत के पैमाने के चलते राजधानी उलानबटार में रात में ही जश्न के कुछ संकेत दिखने लगे थे। जिसके बाद खुरेलसुख एक भाषण में कहा कि राष्ट्रपति पद एक “बड़ी ज़िम्मेदारी” थी।

खुरेलसुख ने कहा, “मैं समझता हूँ कि इस चुनाव में मतदान करने वाले सभी मंगोलियाई लोग आशा व्यक्त कर रहे हैं कि हमने जो काम शुरू किया है, हम उसे पूरा करेंगे… हम अपने देश के लिए और भी बहुत कुछ अच्छा करेंगे।”

खुरेलसुख मौजूदा राष्ट्रपति खल्टमा बत्तुल्गा की जगह लेंगे जिनसे मंगोलिया के संविधान में विवादास्पद परिवर्तनों के बाद फिर से चुनाव में खड़े होने का अधिकार छीन लिया गया है। यह बदलाव मोटे तौर पर राष्ट्रपति को एक कार्यकाल तक सीमित करने का था।

कहा जा रहा है कि खुरेलसुख की जीत तब हुई है जब COVID-19 प्रतिबंधों के चलते वे ज़्यादा प्रचार नहीं कर पाए थे।

 

उखना खुरेलसुख/Al-Jazeera

 

बता दें मंगोलिया की राजनीतिक प्रणाली अपनी निर्वाचित संसद को सरकारें नियुक्त करने और नीति तय करने का अधिकार देती है, लेकिन राष्ट्रपति के पास उस क़ानून को वीटो करने का अधिकार भी होता है।

हाल के समय में विपक्षी दल द्वारा राष्ट्रपति पद के नियंत्रित होने से सत्ता में अधिकारों में बँटवारे पर गतिरोध पैदा हो रहा है और कुछ का मानना है कि इसी ने मंगोलिया में विकास को रोक दिया है।

अब खुरेलसुख की जीत से एमपीपी को सत्ता पर ज़्यादा नियंत्रण मिलने की उम्मीद है, हालांकि वह पद ग्रहण करते ही अपनी पार्टी की संबद्धता को त्यागने के लिए मजबूर हैं।

ग़ौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने “मंगोलिया विदाउट डिक्टेटरशिप” के नारे के तहत प्रचार किया था जिसपर विपक्षी नेता एर्डिन ने चेतावनी दी थी कि देश वन-पार्टी सिस्टम की ओर खिसकता जा रहा है।

Translate »