April 11, 2021

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विशेषज्ञों की चीन को सलाह, जानवरों की तस्करी पर कसी जाये नकेल

WHO द्वारा कोविड19 के आरंभिक स्त्रोत का पता लगाने वाले रिसर्च में जानवरों पर सबसे ज़्यादा संदेह बैठता है जिसके चलते विशेषज्ञों ने कहा कि चीन और उसके पड़ोसियों को न केवल वन्यजीवों के व्यापार पर नकेल कसनी चाहिए बल्कि क़ानूनी ख़ामियों को भी दूर करना चाहिए, जिससे बीमारी फैलाने वाली प्रजातियों को खेती में लगाया जा सके।

ग़ौरतलब है कि WHO द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट में कोरोना के इन्सानों में फैलने की सबसे ज़्यादा आशंका जानवरों से है, जिसमें चमगादड़ों को विशेष तौर पर इसका कारण माना गया है।
संयुक्त अध्ययन में शामिल एक चीनी पशु रोग विशेषज्ञ टोंग यींग ने कहा कि पिछले साल बीजिंग द्वारा मानव उपभोग के लिए वन्यजीवों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया गया था।लेकिन रिपोर्ट ने वन्यजीवों के खेतों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है। पारंपरिक चीनी दवा (टीसीएम) उद्योग, फ़र व्यापार और अधिक स्पिलओवर ज़्यादा जोखिम पैदा कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क के वन्यजीव संरक्षण सोसायटी के मुख्य पशुचिकित्सा क्रिश्चियन वाल्ज़र ने कहा- “खेतों के साथ आपके पास जानवरों का एक बड़ा समूह है जो जेनेटिकली सजातीय यानी होमोजेनस हैं, जहाँ एक वायरस आसानी से विकसित हो सकता है।” 
चीन ने कोरोनोवायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए हज़ारों जानवरों के नमूनों का परीक्षण किया, लेकिन अध्ध्यन ने इस बात की ओर इशारा किया कि अब भी ज़्यादा जाँच की आवश्यकता है। इसमें मिंक और रेककन डॉग फार्म पर भी सन्देह की सुई घूमती है जो एक प्रकार से इंफ़ेक्शन प्रोन होते हैं।
“इन भनायक उद्योगों में एक साथ लाखों जानवरों को ठूँसना महामारी के लिए एक उत्तम पेट्री डिश बनाता है, और जब तक हम फ़र के लिए खेती पर प्रतिबंध नहीं लगाते… हम वैश्विक सार्वजनिक सुरक्षा के साथ रूसी रूले खेलना जारी रखेंगे” हमन सोसायटी इंटरनेशनल के पीटर ली ने चेतावनी दी।
विशेषज्ञों ने कहा कि रेगुलेटरी गैप, लैक्स एनफ़ोर्समेंट और अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह वन्यजीवों के व्यापार को जारी रखने का कारण बन रहा है। SARS-Cov-2 के फ़ैलने में  पैंगोलिन्स एक अहम भूमिका निभा सकता है जो कि लुप्त होने वाली प्रजातियों में से एक है। विदेशी तस्करों का भी ऑपरेशन जारी है। चीनी व्यवसायों के स्वामित्व वाले म्यांमार के सीमावर्ती ज़िले ‘मोंग ला’ का एक ख़ास क्षेत्र लंबे समय से चीन में पैंगोलिन का स्रोत रहा है।
Credit- The Guardian
‘मॉनिटर कंज़रवेशन रिसर्च सोसायटी’ के कार्यकारी निदेशक ‘क्रिस शेफ़र्ड’, जो अवैध वन्यजीवों की तस्करी का अध्ययन करते हैं, ने इस विषय पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा- “मोंग ला में कोई वास्तविक सरकारी नियंत्रण नहीं है। किसी भी प्रकार का कोई प्रवर्तन नहीं है।
“…कई जगहों पर वन्यजीवों की तस्करों को प्रार्थमिकता ही नहीं दी जाती, बल्कि उसे ग़लत काम के रूप में देखा भी नहीं जाता।”
हालाँकि चीन का कहना है कि मूल स्पिलओवर उसकी सीमा से परे हो सकता है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि म्यांमार और लाओस में वन्यजीवों का व्यापारी नेटवर्क चीनी माँग और चीनी निवेश के बिना मौजूद नहीं रह सकता।
हांगकांग विश्वविद्यालय के एक पशु कल्याण क़ानून विशेषज्ञ अमांडा व्हिटफ़ोर्ट कहते हैं- “मैं ये नहीं मान सकता कि चीनी इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं, वे इसे चला रहे हैं।”
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