विदेश मंत्री जयशंकर का बांग्लादेशी समकक्ष को नसीहत, “कर्ज चाहने वाले देशों को अव्यावहारिक परियोजनाओं के बारे में सोचने की जरूरत”

by Sachin Singh Rathore
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जर्मनी के म्यूनिख शहर में म्यूनिख सिक्योरिटी कांफ्रेंस 2022 के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन पर निशाना साधते हुए बांग्लादेश सहित एशिया के देशों को फालतू कर्ज लेने पर नसीहत दी है।

S Jaishankar/Reuters

अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक इससे पहले कांफ्रेंस में बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमिन ने क्वॉड देशों पर तंज करते हुए कहा था कि क्या क्वॉड भी उसी तरह से आर्थिक मदद उपलब्ध करा सकता है जैसे चीन करता है। इस पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन की कर्ज एजेंडे में डूबे देशों को नसीहत देते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।
एस जयशंकर ने कहा कि कर्ज में डूबे देशों को अव्यावहारिक परियोजनाओं के बारे में सोचना चाहिए। मसलन खाली पड़े एयरपोर्ट और बंदरगाह विदेश मंत्री का सीधा निशाना चीन का कर्ज एजेंडा का शिकार बने देशों की तरफ था जो विकास परियोजनाओं के नाम पर देश के महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लीज रख कर इसकी कीमत चुकाते हैं।

भारत और चीन के रिश्ते मुश्किल दौर में

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के साथ सीमा विवाद पर कहा कि भारत को चीन के साथ एक समस्या है, वो ये कि 1945 से 1975 तक सीमा पर शांति रही, सीमा प्रबंधन स्थिर रहा, कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ। लेकिन अब ये बदल गया है क्योंकि हमने चीन के साथ सीमा, जो असल में वास्तविक नियंत्रण रेखा है, उस पर सैन्यबलों की तैनाती नहीं करने के लिए समझौते किए, लेकिन चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया है। चीन के साथ रिश्तों के सवाल का जवाब देते हुए एस जयशंकर ने कहा कि “चीन द्वारा सीमा समझौतों का उल्लंघन करने के बाद भारत और चीन के रिश्ते मुश्किल दौर में हैं। सीमा की दशा ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा को तय करेगी। साथ ही उन्होंने कहा स्वाभिक तौर पर सीमा की स्थिति ही चीन के साथ रिश्तों का आधार है हालांकि उन्होंने कहा जून 2020 के बाद से पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते बेहतर हुए हैं।

हिंद प्रशांत क्षेत्र में क्वॉड को लेकर जताई प्रतिबद्धता

क्वॉड देशों द्वारा हिंद प्रशांत क्षेत्र के भविष्य के सवाल पर अपनी प्रतिबद्धताएं जाहिर की हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि हमने देखा कि हमारे क्षेत्र (एशिया) सहित कई देश बड़े-बड़े कर्ज़ में डूबे हुए हैं। हमने ऐसी परियोजनाएं देखी हैं जो व्यावसायिक रूप से किसी काम की नहीं, हवाई अड्डे, जहां एक विमान नहीं आता है, बंदरगाह जहां एक जहाज़ नहीं आता। भारत का निशाना चीन के कर्ज तले डूबे श्रीलंका की और था। दरअसल श्रीलंका ने चीन से पहले विकास के नाम पर कर्ज लिया और कर्ज वसूलने के नाम चीन ने हंबनटोटा पोर्ट और मताला एयरपोर्ट को 99 साल की लीज पर रख लिया।

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