May 14, 2021

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कोरोना संक्रमण अंतिम संस्कार करने वाली जगहों को कैसे कर रहा है प्रभावित?

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण देश में स्थिति अब बेक़ाबू होती नज़र आ रही है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्न उठने शुरू हो गये है, लोग इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चक्कर काटने को विवश हैं।

ऐसे में न केवल अस्पतालों की हालत ख़राब है बल्कि अंतिम संस्कार करने वाले घाटों पर भी लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है। इस बाबत उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में हालात ज़्यादा ख़राब हैं।

उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में स्थिती दिन-ओ-दिन चिंताजनक होती जा रही है। भोपाल में कुछ संगठनों ने दावा किया है कि राजधानी में ‘भोपाल गैस त्रासदी’ के बाद पहली बार इतनी भयावह स्थिति देखी जा रही है।
कई पत्रकारों का यह दावा है कि उत्तरप्रदेश की स्थिती सरकारी आंकड़ों के बिल्कुल उलट है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जान गँवाने वाले लोगों के परिजनों को उनके अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पर टोकन लेने के बाद आठ से दस घंटे इंतज़ार करना पड़ रहा है।

घंटों का इंतज़ार

ख़बरों के मुताबिक़ राजधानी लखनऊ के बैकुंठ धाम विद्युत शवदाह गृह में रोज़ाना क़रीब 25 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। शवदाह गृह के एक कर्मचारी मुन्ना सिंह ने समाचार एजेंसी बीबीसी को बताया कि एक शव के ‘अंतिम संस्कार में क़रीब 45 मिनट का वक़्त लगता है और यहां दिन भर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।’
ग़ौरतलब है कि सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ अप्रैल महीने में लखनऊ में रोज़ाना औसतन पाँच से दस मौतें दर्ज की जा रही हैं लेकिन बैकुंठ धाम हमें कोई और तस्वीर दिखा रहा है जहाँ हर दिन कोविड प्रोटोकॉल के तहत 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। ख़बर ये भी है कि कुछ शवों काअंतिम संस्कार कई अन्य घाटों पर भी हो रहा है लेकिन कोविड संक्रमण से मरने वालों का अंतिम संस्कार बैकुंठ धाम पर ही हो रहा है।
इसपर मुन्ना सिंह बताते हैं, “होली के बाद से यह संख्या लगातार बढ़ी है। ज़्यादातर शव केजीएमयू अस्पताल से आ रहे हैं जिनका अंतिम संस्कार सुबह तीन से चार बजे तक किया जा रहा है।”

सरकारी आँकड़ों पर उठता सवाल

बैकुंठ धाम की तस्वीर ये है कि वहाँ शवों की कतार लगी रहती है। वहाँ मौजूद एक शख़्स ने बताया कि उन्होंने एक ही एम्बुलेंस के तीन से चार शवों को भी आते देखा है। उन्होंने कहा कि यहाँ घंटों एम्बुलेंस की लाइन लगी रहती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी के दफ़्तर से जारी आंकड़ों के मुताबिक़ लखनऊ में पिछले तीन दिनों में कोरोना संक्रमण के कारण 20 मरीज़ों की मौत हुई है जबकि श्मशान घाटों पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत 60 कोरोना पॉज़िटिव लोगों का अंतिम संस्कार किया गया है।
लखनऊ के अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया, “हमारे पास दो घाटों पर तीन मशीनें हैं। गुल्लारा घाट पर एक मशीन और बैकुंठ धाम पर दो मशीनें हैं। संख्या बढ़ने की वजह से दो-तीन घंटे का इंतज़ार करना पड़ रहा है। चूंकि बैकुंठ धाम नज़दीक है तो लोग यहीं ज़्यादा आते हैं। गुल्लारा घाट पर भीड़ ज़्यादा नहीं है। हम कोशिश कर रहे हैं कि इतना इंतज़ार न करना पड़े।”

भोपाल के बिगड़ते हालात

भोपाल की स्थिति भी कुछ ऐसी ही नज़र आती है। कइयों का दावा है कि लाशों के अंतिम संस्कार के लिये यहाँ लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है। राजधानी भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर गुरुवार को कोरोना संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले 31 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। यहाँ उन लोगों के शव भी आते हैं जिनकी मौत का कारण कोरोना नहीं है।
यहाँ लोगों को अंतिम संस्कार के लिए दो-दो घंटे का इंतज़ार करना पड़ रहा है। साथ ही इसके लिए कम से कम लोगों को ही भेजा जा रहा है।
भदभदा श्मशान के प्रबंधक लाड सिंह सेन ने कहा “स्थिती लगातार बिगड़ रही है। एक ही समय में कई-कई शवों को जलाया जा रहा है ताकि हालात को क़ाबू में रखा जा सके। नियत जगह के अलावा नई जगहों पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है।”

कैसे होगा इंतज़ाम?

भदभदा श्मशान में गुरुवार को भोपाल के 13 कोविड संक्रमितों के अलावा, आसपास के ज़िलों के 18 लोगों के अंतिम संस्कार किया गया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ‘सुभाष नगर विश्राम घाट में पाँच संक्रमितों का दाह संस्कार किया गया और पाँच अन्य शवों को शहर के झदा कब्रिस्तान में दफ़नाया गया। इस तरह से गुरुवार को कुल 41 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें एक आठ महीने की एक बच्ची भी शामिल है जिसकी मौत कोरोना संक्रमण से हुई।’
लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाली संस्था ‘जनसंवेदना’ के राधेश्याम अग्रवाल इस स्थिती को भयानक बताते हैं। उनके मुताबिक़ लाशों को जलाने के लिए श्मशान में अलग से जगह बनानी पड़ रही है।
साथ ही उनका ये भी कहना है कि कई लोग आर्थिक रूप से इतने कमज़ोर हैं कि उनके पास अंतिम संस्कार करने के लिए पैसे नहीं होते, ऐसे में हमारी संस्था उनकी मदद कर रही है।
भोपाल या उत्तरप्रदेश में ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी ऐसी ही परिस्थितियाँ बन रही हैं जहाँ लोगों का अंतिम संस्कार करना मुश्क़िल हो रहा है। इंदौर से भी ऐसी ही ख़बरें आ रही हैं।
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