September 26, 2021

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जर्मनी ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आतंक पर रखी शर्त, कहा अगर शरिया क़ानून लागू होगा तो हम नहीं देंगे कोई वित्तीय सहायता

गुरुवार को जर्मनी ये विदेश मंत्री ने ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ़ को बताया कि अगर तालिबान देश में सत्ता संभालता है और शरिया क़ानून लागू करता है, तो जर्मनी अफ़ग़ानिस्तान को कोई वित्तीय सहायता नहीं देगा।

 

 

विदेश मंत्री हेइको मास ने कहा, “हम हर साल 430 मिलियन यूरो (505 मिलियन डॉलर) उन्हें प्रदान करते हैं, अगर तालिबान देश पर क़ब्ज़ा कर लेता है और शरिया क़ानून लागू करता है तो हम एक भी प्रतिशत नहीं देंगे।”

अधिकारियों के अनुसार, अफ़ग़ान सरकारी बलों ने गुरुवार को और कई शहरों में तालिबान लड़ाकों से लड़ाई लड़ी, क्योंकि आतंकवादियों ने बेहद आक्रामक तरीके से उनपर दबाव डाला। अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी का मानना ​​​​है कि वे 90 दिनों के भीतर राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा कर सकते हैं।

बता दें कि अमेरिका NATO तहत अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है। इस घोषणा के बाद से ही इस्लामिक कट्टरपंथी समूह तालिबान लगातार देश को क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है। इसके चलते अफ़ग़ान सुरक्षाबलों और तालिबानी सैनिकों के बीच संघर्ष जारी है।

इस संघर्ष में अबतक 1 हज़ार से ज़्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं। तालिबान बच्चों, औरतों और मौलवियों को अपना निशाना बना रहा है।
ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि उन्हें अपनी सेना अफ़ग़ानिस्तान से वापस बुलाने पर कोई पछतावा नहीं है और अफ़ग़ान सैनिक तालिबान से लड़ने में सक्षम हैं।

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