September 25, 2021

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दिल्ली के पुराने किले के म्यूजियम में सिमटी पुरखों की विरासत !

दिल्ली के पूराने किले के म्यूजियम में 11वीं और 12वीं शताब्दी की हिंदू और जैन देवी- देवताओं की मूर्तियों का होना कोई नई बात नहीं है। ये मूर्तियां इतिहास का गवाह है कि कभी दिल्ली में भगवान शिव और जैन धर्म के मानने वाले लोग भारी संख्या में रहते थे, जिन्होंने अपने- अपने धर्म के देवी- देवताओं की मंदिरें बनवाई थी, लेकिन आज हिंदू और जैन धर्म की देवी देवताओं की ये मूर्तियां पूराने किले में सिर्फ पब्लिक डिस्प्ले में सिमटकर रह गई है। इसपर सवाल उठना लाजिमी है कि, इन मंदिरों को किन शासकों ने और कब बनवाया था औऱ किन लोगों ने इन मंदिरों को तोड़ा।

इतिहास के पन्नों को उलटकर अगर आप देखें तो 11वीं शताब्दी में अफगानियों के दिल्ली आने के बाद  देशभर के मंदिरों को तोड़ा गया । लेकिन इतिहासकारों ने इस गंभीर विषय पर लिखने के बजाय कंजूसी ही दिखाई। लेकिन गंभीर सवाल ये है आज भी लोग इस बात से अनजान है कि देशभर में हिंदूओं और जैन देवी-देवताओं की मंदिरें थी जिसे  तोड़ दिया गया? जिसकी चर्चा इतिहास के किताबों में वृहद रूप से नहीं मिलती है जो कई सवाल खड़े करती है?

यूं तो दिल्ली का नाम जेहन में आते ही महाभारत की यादें ताजा हो जाती है। क्योंकि दिल्ली को पांडवों ने कई हजार साल पहले बसाया था तब इसे इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। पांडवों के बाद दिल्ली पर कई दूसरे हिंदू राजाओं ने अलग- अगल समय में शासन किया। इन राजाओं के शासनकाल के समय राज्यों में मंदिरें भी बनवाई गईं जिनमें भगवान शिव और जैन धर्म के मानने वाले राजाओं की मंदिरें थी।

भारतवर्ष पर राज करनेवाले राजाओं में चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदूसार और सम्राट अशोक से लेकर राजा कृष्णदेव राय तक औऱ उनके बाद भी कई हिंदू राजाओं ने भारत पर शासन किया। इस दौरान मंदिरें भी बनवाई गई जो इतिहास में दर्ज है लेकिन आज अगर देखा जाय तो ये सिर्फ इतिहास में सीमित रह गई है इसकी बर्बादी के पीछे कौन थे और उनका मकसद क्या था जिनके बारे में इतिहासकारों ने भी बहुत ज्यादा जिक्र नहीं किया?

दिल्ली पर शासन करने वाले कद्दावर राजाओं में पृथ्वीराज चौहान का नाम सबरसे ऊपर आता है। 11वीं शताब्दी का ये वही दौर था जब दिल्ली पर मुहम्मद गोरी ने आक्रमण किया था, पहली बार पृथ्वीराज चौहान के हाथों पराजित होने के बाद दूसरी बार फिर आक्रमण किया और दिल्ली को मुहम्मद गोरी ने जीत लिया। जिसके बाद अफगानों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अफगानों के बाद दिल्ली समेत देशभर में मुगलों ने शासन किया ।

 

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