September 28, 2021

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हिंदी दिवस के मौक़े पर बोले गृह मंत्री अमित शाह, कहा ‘हमें भाषा के साथ भी आत्मनिर्भर होना होगा’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को हिंदी दिवस के मौक़े पर कहा कि भारत की प्रगति में मातृभाषा और राजभाषा के बीच एक समन्वय में है।

 

ANI

 

शाह ने कहा, “जब संविधान को स्वीकार किया गया, तो हमने 14 सितंबर 1949 को एक निर्णय और स्वीकार किया कि इस देश की ‘राजभाषा’ हिंदी होगी और ‘लिपी’ देवनागरी होगी। हिंदी के साथ, हमने क्षेत्रीय भाषाओं को स्वीकार करने का भी निर्णय लिया।”

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “हिंदी दिवस के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे मूल कार्यों में अपनी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा हिंदी का उत्तरोत्तर प्रयोग करने का संकल्प लें।”

शाह ने प्रसन्नता व्यक्त की कि 2014 के बाद से राज्य विधानसभाओं में भारतीय भाषाओं का उपयोग बढ़ा है। “‘आत्मनिर्भर’ होना केवल देश के भीतर उत्पादन करने के बारे में नहीं है, हमें भाषाओं के साथ भी ‘आत्मनिर्भर’ होना है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी बोल सकते हैं, तो हमें किस बात पर शर्म आती है? वे दिन गए जब हिंदी में बोलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक चिंता का विषय थे,” शाह ने कहा।

बता दें कि 14 सितंबर 1949 में हिंदी भाषा को पहली बार भारत की संविधान सभा द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी का उपयोग करने का निर्णय 26 जनवरी, 1950 को भारत के संविधान द्वारा वैध किया गया था। 25.8 करोड़ लोगों द्वारा मूल भाषा के रूप में बोली जाने वाली हिंदी को दुनिया में चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है।

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