December 2, 2021

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म्यांमार: सेना की क़ैद से निकलने ने बाद अब कैसी है पीड़ितों की ज़िंदगी?

म्यांमार: म्यांमार सेना द्वारा अगवा और प्रताड़ित किए गए नागरिकों ने कहा कि वे अपनी रिहाई के बाद गंभीर अवसाद और लगातार बढ़ती मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं दहशत में जी रहे हैं।

 

Myanmar protest/al Jazeera

 

रेडियो फ्री एशिया ने बताया कि ऐसा तब हुआ है जब म्यांमार की सेना ने फरवरी में देश में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंका और विरोध करने वालों को गिरफ़्तार कर लिया गया। इन बंदियों ने कहा कि वो गहरे अवसाद का शिकार हो रहे हैं।

 

अब कैसे जी रहे हैं पीड़ित?

म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून के एक नागरिक ने कहा, “उन्होंने मेरी कमीज़ फाड़ दी… और फिर मुझे छाती और बाँहों पर डंडों से मारा। जब मैंने अपना चेहरा ढँक लिया, तो उनमें से लगभग 151 ने मुझे मेरे पूरे शरीर पर पीटा, मुझे गर्दन और पीठ में लात मारी।”

उन्होंने कहा, “बाद में, जेल में रहते हुए, मैंने कुछ ऐसे लोगों को देखा जिनके शरीर पर गहरे घाव थे, जो लगभग एक महीने से वहां थे, लेकिन किसी कारण से उन्हें कभी कोई दवा नहीं दी गई।”

यांगून के नागरिक ने कहा, “मुझे उतना कष्ट नहीं हुआ जितना उन्होंने झेला, लेकिन इसने मुझे बहुत परेशान किया।”
यांगून के लोगों ने कहा कि वह अब बेचैन और हमेशा डरे हुए रहते हैं।

थाव की ही तरह, कई अन्य लोग, जिनमें ज़्यादातर युवा थे, थे तख़्तापलट का विरोध करने पर उन्हें जुंटा ने हिरासत में ले लिया।

संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक मार्टिन ग्रिफिथ्स ने सोमवार को कहा, कि इस बीच बढ़ते संघर्ष, असुरक्षा, COVID-19 और एक विफल अर्थव्यवस्था ने भी 3 मिलियन बर्मियों की ज़िंदगी को ख़तरे में डाल दिया है।

बता दें कि म्यांमार में 1 फरवरी से उथल-पुथल जारी है क्योंकि सीनियर जनरल मिंग आंग हलिंग के नेतृत्व में म्यांमार की सेना ने नागरिक सरकार को उखाड़ फेंका और एक साल के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी। इसके बाद म्यांमार के एक बड़े तपके ने इसका विरोध किया जिसमें सैंकड़ों लोगों की जान चली गई।

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