October 24, 2021

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भारत में सरकार के आलोचकों पर निशाना, मानवाधिकारों का हनन और घट रहे हैं नागरिक अधिकार – ह्यूमन राइट्स वॉच

ह्यूमन राइट्स वॉच मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि भारत में पत्रकारों, अधिकारी, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सरकार के आलोचकों को कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का इस्तेमाल कर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

 

 

इसी महीने यानी सितंबर 2021 में सरकारी वित्तीय अधिकारियों ने दिल्ली, मुंबई और श्रीनगर में कई जगहों पर छापेमारी की। इन छापों में एक अभिनेता, एक पत्रकार और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के कार्यालय और घर पर छापेमारी शामिल है।

इन बाबत ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि छापेमारी की ये कार्रवाई राजनीति से प्रेरित हैं। बीजेपी की सरकार आने के बाद ये छापेमारी भी अभिव्यक्ति की आज़ादी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर की जा रही कार्यवाही का एक हिस्सा है।

“इस क्रम में राजनीति से प्रेरित कई आपराधिक मामले भी शामिल हैं जिसमें कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों, छात्रों और अन्य के ख़िलाफ़ राजद्रोह तक का मुक़दमा दर्ज किया गया है। आलोचकों और मुखर समूहों को निशाना बनाने के लिए विदेशी फंडिंग नियमों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी इस्तेमाल किया गया है।”

मीनाक्षी गांगुली, जोकि ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक हैं, ने कहा, “भारत सरकार की छापेमारी आलोचकों को परेशान करने और डराने-धमकाने के इरादे से की गई लगती है। यह आलोचकों को चुप कराने की कोशिश के एक पैटर्न को दर्शाती है।”
वह आगे कहती हैं कि “ये भारत के मूल लोकतांत्रिक संस्थानों को कमज़ोर करती हैं और मौलिक स्वतंत्रता को भी।”

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड जैसे पत्रकार संगठनों ने बार-बार मीडिया की स्वतंत्रता पर हमले ना करने का आह्वान किया है और साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर एक खुला हमला है।

इस विषय पर समाचार एजेंसी बीबीसी लिखता है कि, “सबसे हालिया घटना में 16 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दिल्ली में एक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के घर और कार्यालय पर छापेमारी की। छापेमारी के समय मंदर एक फेलोशिप के लिए जर्मनी में थे। कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और पूर्व सिविल सेवकों ने छापे की निंदा की है।”

यही नहीं इससे पहले 16 सितंबर को अभिनेता और लोगों की मदद के लिए ख्याति प्राप्त सोनू सूद से जुड़े मुंबई के परिसर और कुछ अन्य जगहों पर इनकम टैक्स के अधिकारी में छापा मारा था।

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक़ आयकर विभाग ‘एक रियल एस्टेट सौदे की जांच कर रहा है।’
यही नहीं 8 सितंबर को जम्मू और कश्मीर में पुलिस ने 4 कश्मीरी पत्रकारों – हिलाल मीर, शाह अब्बास, शौकत मोट्टा और अज़हर कादरी के घरों पर छापा मारा था और उनके फ़ोन और लैपटॉप ज़ब्त कर लिए थे।

ग़ौरतलब है कि इसके दो दिन बाद ही आयकर विभाग ने कथित चोरी के तहत न्यूज़लॉन्ड्री और न्यूज़क्लिक के कार्यालयों पर छापा मारा था।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त और अलग-अलग मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में मानवाधिकार के साथ ही साथ पिछले कुछ सालों में नागरिकों के कम होते अधिकार क्षेत्र और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, आलोचकों के बढ़ते उत्पीड़न पर चिंता ज़ाहिर की है।

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