July 24, 2021

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सैंकड़ों नेताओं ने लिखी जी-7 को चिट्ठी, वैश्विक टीकाकरण के लिए किया भुगतान का आग्रह

सौ पूर्व राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और विदेश मंत्रियों ने सात समृद्ध देशों के समूह ‘जी-7′(Group of Seven) से वैश्विक कोरोनावायरस टीकाकरण के लिए भुगतान करने का आग्रह किया है जिससे यह वायरस दोबारा वैश्विक महामारी के रुप में वापस न लौटे।

 

नेताओं ने इंग्लैंड में जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले यह अपील की है जो शुक्रवार से शुरू हो रहा है और तब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान के नेताओं से मुलाकात करेंगे।

G7 को लिखे अपने पत्र में, पूर्व विश्व नेताओं ने कहा कि 2020 में वैश्विक सहयोग विफल हो गया था, लेकिन 2021 एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।

 

Credit- banjerry.com

 

पत्र में कहा गया है, “जी-7 और जी-20 का समर्थन, जो निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए टीकों को आसानी से सुलभ बनाता है, दान का कार्य नहीं है, बल्कि हर देश के रणनीतिक हित में है।”

हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व ब्रिटिश प्रीमियर गॉर्डन ब्राउन और टोनी ब्लेयर, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान-की मून और 15 पूर्व अफ़्रीकी नेता शामिल थे। उन्होंने कहा कि G-7 और शिखर सम्मेलन में आमंत्रित अन्य नेताओं को दुनियाभर में महामारी से लड़ने के लिए दो वर्षों में लगभग 30 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष की राशि का भुगतान करने की गारंटी देनी चाहिए।

ब्राउन ने कहा, “जी-7 के लिए भुगतान करना दान नहीं है, यह बीमारी को फैलने, बदलने और हम सभी को धमकी देने के लिए लौटने से रोकने के लिए आत्म-सुरक्षा है।”

 

Credit- Reuters

 

उन्होंने एक बयान में कहा, “यूके में प्रति व्यक्ति प्रति सप्ताह केवल 30 पेंस (30 रुपये) की लागत, दुनिया में सबसे अच्छी बीमा पॉलिसी के लिए भुगतान करने के लिए एक छोटी सी क़ीमत है।”

उनकी दलील ‘सेव द चिल्ड्रन चैरिटी’ के एक सर्वेक्षण के साथ मेल खाती है, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और कनाडा में G-7 के लिए वैश्विक स्तर पर COVID-19 टीकों के लिए आवश्यक 66 बिलियन डॉलर के भुगतान के लिए मज़बूत सार्वजनिक समर्थन मिला है।

सर्वेक्षण(Poll) में पता चला कि ब्रिटेन में 79 फ़ीसद लोग इस तरह की नीति के पक्ष में थे वहीं 79 फ़ीसद अमेरिकियों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। इनमें फ़्रांस का समर्थन सबसे कम था, जहां 63 फ़ीसद लोग इस नीति के पक्ष में थे।

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