April 11, 2021

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मारवा सुलेहदोर: ‘मुझे स्वेज़ नहर जाम करने का उत्तरदायी माना गया’

बीते दिनों स्वेज़ नहर में फँसी ‘एवरगिवेन’ जहाज की घटना का ज़िम्मेदार मारवा सुलेहदोर को माना जा रहा था, जिससे दुनियाँभर का व्यापार प्रभावित हुआ। उन्होंने देखा कि सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर उनपर निशाना साधा जा रहा था।

Marva Elselehdar
मिस्र की पहली महिला जहाज़ कप्तान मारवा बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहती हैं, “ये ख़बरें देख कर मुझे झटका-सा लगा।”
जिस वक्त स्वेज़ नहर का रास्ता बाधित हुआ था, उस वक्त सुलेहदोर वहाँ से सैंकड़ों मील दूर एलेक्ज़ेंड्रिया में ‘आएडा-फ़ोर’ नाम के जहाज़ में बतौर फर्स्ट मेट काम कर रही थीं, जो लाल सागर पर मौजूद एक लाइटहाउस तक ज़रूरी सामान पहुँचाता है।
इंटरनेट पर ‘एवरगिवेन’ जहाज के फँसने में सुलेहदोर की भूमिका की बाबत स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे थे, जो ख़बरों के मुताबिक़ ‘अरब न्यूज़’ नाम की वेबसाइट ने छापा था। इस ख़बर में मारवा की एक तस्वीर का भी इस्तेमाल किया गया था जो एडिटेड थी।

‘शायद महिला होने के कारण निशाना बनाया गया’

‘एवरगिवेन’ जहाज़ के फँसने के बारे में झूठी ख़बर फैलाने के लिए उनके नाम से कई फ़र्जी ट्विटर अकाउंट भी बनाए गए।
29 वर्ष की मारवा ने बताया कि वे नहीं जानतीं कि किसने यह ख़बर फैलाई और क्यों।
वो कहती हैं, “मुझे लगा कि मुझे निशाना बनाया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में मैं एक सफल महिला हूँ और मैं मिस्र से हूँ। लेकिन मैं पुख्ता तौर पर ये नहीं कह सकती कि ऐसा क्यों किया गया होगा।”
मारवा ने ये भी बताया कि एक महिला होने के बतौर उन्हें मर्चेंट नेवी की पढ़ाई करने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा। उन्होने बताया कि चूँकि ज़्यादातर लोग उनसे उम्र में बड़े थे, बात करना मुश्किल था।
उन्होंने कहा- “मेरे साथ पढ़ने वालों में अधिकतर ज़्यादा उम्र के पुरुष थे जो अलग-अलग सोच रखते थे। ऐसे में बातचीत करने के लिए समान सोच का व्यक्ति तलाशना मुश्किल था। अपनी मानसिक सेहत को बनाए रख कर इन सबसे अकेले गुज़रना बहुत बड़ी चुनौती था।”
“हमारे समाज में आज भी लोग ये स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं कि महिलाएं अपने परिवारों से दूर रह कर अकेले समंदर में काम कर सकती हैं। लेकिन जब आप वो काम करते हैं जिससे आपको प्यार होता है तो फिर इसके लिए दूसरों की इजाज़त लेना ज़रूरी नहीं होता।”
मारवा की अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें फर्स्ट मेट के बतौर जहाज का कार्यभार सौंपा गया। साल 2015 में जब स्वेज़ नहर में पहली बार ‘आएडा-फ़ोर’ जहाज़ को उतारा गया तो मारवा को उसका कप्तान बनाया गया।
उस वक्त मारवा मिस्र की सबसे युवा और पहली महिला कप्तान थीं जिन्होंने स्वेज़ नहर पार किया था। साल 2017 मिस्र में हुए महिला दिवस समारोह में राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी ने उन्हें सम्मानित भी किया।

अफ़वाहें और मारवा

जब ये अफ़वाहें उड़ीं तो उन्हें लगा कि इसका असर उनके काम पर भी पड़ेगा।
इस संबंध में वे कहती हैं, –“ये फ़र्जी ख़बर अंग्रेज़ी में थी और इसलिए कई देशों में तेज़ी से फैल गई। मैंने इस ख़बर का खंडन करने की पूरी कोशिश की क्योंकि इससे मेरी प्रतिष्ठा को नुक़सान हो रहा था और इस मुक़ाम तक पहुंचने के लिए मैंने अब तक जो मेहनत की ये अफ़वाह उन सब पर पानी फेर रहा था।”
हालाँकि उनका कहना है कि जहाँ एक ओर लोग उनपर झूठे आरोप लगा रहे थे वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के कारण उनका हौसला भी बढ़ा।
“इन फ़र्जी ख़बर वाले लेख में कई कंमेंट थे जो नकारात्मक थे। लेकिन कई आम लोगों ने और मेरे साथ काम करने वालों में कई सकारात्मक कमेंट भी लिखे थे।”
“मैंने उन पर ध्यान दिया जो मेरा उत्साह बढ़ा रहे थे। जो प्यार मुझे मिल रहा था उसने मेरे गुस्से को ख़त्म कर दिया और मुझे लगा कि मैं लोगों की आभारी हूँ। ये बात भी सच है कि इसके बाद अब मुझे पहले से ज़्यादा लोग पहचानते हैं।”
मारवा कप्तान कि पोज़ीशन पाने के लिए इस साल परीक्षा देने वालीं हैं। वे चाहती हैं कि इस पेशे में आने वाली महिलाओं के लिए वे प्रेरणा बनें।
वो कहती हैं, “जो महिलाएं इस इंडस्ट्री में आना चाहती हैं मैं उनसे कहना चाहती हूँ कि जो काम आप करना चाहती हैं उसके लिए लड़ने से पीछे न हटें और नकारात्मक सोच को ख़ुद पर हावी न होने दें।”
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