May 13, 2021

MotherlandPost

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अगर बाबा साहेब से सीख लेते तो समाज आज बहुत आगे होता।

जब जब भीम राव अम्बेडकर को याद किया जाता है तब तब धर्म, संस्कृति के विकास और धर्म को ज़िंदा रखने जैसे प्रश्न उठते हैं फिर भी जातीय एवम क्षेत्रीय और पिछड़े जैसी परंपरा खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

Credit : https://www.symbiosis-ambedkarmemorial.org/

बाबा साहब का जन्म आज यानी 14 अप्रैल को एक छोटे से दलित परिवार में हुआ था लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर आज दुनिया मे लोगों के लिए प्रेरणा बन गए। जब जाति श्रेष्ठता चरम पर थी तब बाबा साहेब ने महाड में जल सत्याग्रह, फिर मार्च 1930 नासिक में कालाराम मंदिर में दलित प्रवेश का सत्याग्रह चलाया था। बाबा साहेब के बाद गांधी जी ही एकमात्र नेता थे जिन्होंने इस अलगाव के खिलाफ डटकर सामना किया और इसे एक मिशन बनाया।

बाबा साहेब का पूना पैक्ट और राजनीतिक आरक्षण जैसे बड़े कामों में सहयोग किया, बाबा साहेब को संविधान ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया, उन्होंने देश को लोकतांत्रिक अधिकार दिलाया सामाजिक एकीकरण को का बहुत प्रयास किया लेकिन पूरी तरह सफल न हो सके।

राष्ट्रवाद के माहौल ने एक सीमा तक सही लेकिन कुछ हद तक जातीय शक्तियों को रोक दिया, जिस तरह जातीय श्रेष्ठता के नकली अहँकार को छोड़ राष्ट्रवादी के रूप में देखा गए यह बाबा साहेब ने ही व्याख्यान किया था। जातिवाद को समाप्त कर सामाजिक एकता का विस्तार करना ही राष्ट्रहित होगा।अगर सभी वैदिक संस्कृति और सनातन धर्म से हमारी उत्पत्ति हुई है तो न कोई जन्म से शुद्र और न कोई जन्म से ब्राह्मण। यह सभी के कार्यों के अनुसार बांटे गए लेकिन यह दूषित होकर जन्म से उसका आधार बताया जाने लगा।

Credit: https://www.symbiosis-ambedkarmemorial.org/

अगर आज लोग बाबा साहेब के कदमों पर चल रहे होते तो सामाजिक एकता के रास्ते बनते और समाज के विकास में हम कई पीढ़ी आगे चले गए होते।

लेकिन वर्तमान में कुछ चीज़ें बदल रही हैं , लोग जातिवाद से उठ कर शान के साथ जीना सीख रहे हैं, आज की पीढ़ी अपने दायित्वों को निभाने का प्रयास कर रही है।

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