October 24, 2021

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6 महीने तक रह सकती है बिजली की किल्लत, बढ़ सकते हैं दाम

कोयले के भंडार के रूप में भारत एक बढ़ते संकट से जूझ रहा है, देश की बिजली का लगभग 70% उत्पादन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ईधन, बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही सबसे कम होता जा रहा है। ऐसी किल्लत बरसों में कभी नहीं देखी गई।

 

Reuters

 

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, कोयले से चलने वाले बिजली स्टेशनों के पास अब ईंधन का औसतन केवल चार दिनों का स्टॉक है, और आधे से अधिक संयंत्र पहले से ही आउटेज के लिए अलर्ट पर हैं।

बिजली मंत्री राज कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि देश को 6 महीने तक इस कमीं का सामना करना पड़ सकता है। बिजली की कमी पहले से ही उभर रही है और बिजली मंत्रालय के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपलब्ध बिजली आपूर्ति और पीक डिमांड के बीच का अंतर सोमवार को 4 गीगावाट से अधिक हो गया।

आमतौर पर अक्टूबर में औद्योगिक और घरेलू खपत काफ़ी बढ़ जाती है क्योंकि इस महीने के बाद भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होता है। ऐसे में यह एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को रोक सकता है जब भारत पहले से ही।7.3 फ़ीसद GDP के संकुचन से जूझ रहा है।

ये किल्लत 6 महीने तक रह सकती है जिसका बिजली के दामों पर भी असर पड़ सकता है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक़, 3 अक्टूबर को कोयले से बिजली बनाने वाले 64 प्लांट्स में चार दिन से भी कम का कोयला स्टॉक बचा था।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 16 पावर प्लांट में कोयला ख़त्म हो गया है जिससे बिजली नहीं बनाई जा सकती। सितंबर के आख़िरी दिन भारत में कोयले से चलने वाले 135 पावर प्लांट्स में से आधे से ज़्यादा में औसतन चार दिन का कोयला ही बचा था।

 

कुछ बोले ऊर्जा मंत्री?

इस मामले में ऊर्जा मंत्री भी अस्पष्ट ही दिखाई दिए। उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं जानता कि आने वाले पांच से छह माह में भी हम ऊर्जा के मामले में आरामदायक स्थिति में होंगे। 40 से 50 गीगावॉट की क्षमता वाले कोयला प्लांट्स में तीन दिन से भी कम का ईंधन बचा है। सरकारी मंत्रालय कोल इंडिया और एनटीपीसी लिमिटेड जैसी सरकारी कोयला कंपनियों से कोयले के खनन को बढ़ाने के लिए काम कर रही है ताकि मांग के मुताबिक़ बिजली बन सके।’

 

क्यों गहराया भारत में बिजली संकट?

बता दें कि देश में 70 फ़ीसद बिजली, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट से ही बनती है। जब से महामारी का फैलाव धीमा हुआ है और प्रतिबंध हटे हैं, तबसे आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं और बिजली के उपयोग में भी बढ़ोत्तरी हुई है। इसके उलट कोयला उत्पादन में कमीं आई है। भारत अपनी ज़रूरत का 75 फ़ीसद कोयला खुद बनाता है लेकिन इस साल भारी बारिश से कोयले की खदानों में पानी भर जाने से खनन का काम नहीं हो सका है।

 

क्या होगा प्रभाव?

बिजली की किल्लत से न केवल अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि बिजली के दाम भी बढ़ सकते हैं और क्रिसिल के इंफ्रास्ट्रक्चर अडवायजरी, प्रणव मास्टर के अनुसार लोगों को कुछ ही दिनों के भीतर बिजली के बढ़ते दामों का सामना करना पड़ सकता है।

 

कब तक सुधरेंगे हालात?

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के हवाले से इसपर मवभारत टाइम्स ने लिखा है कि, “जब तक कोयले की सप्लाई स्थिर नहीं हो जाती, तब तक कुछ पॉकेट्स में पावर ठप होने की समस्या देखने को मिल सकती है। बारिश का सीजन खत्म होने के बाद ही इसमें स्थिरता आने की उम्मीद है। वहीं अगले साल मार्च तक पावर प्लांट्स के पास कोयले का स्टॉक बेहतर होने की उम्मीद है।”

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