September 24, 2021

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इसराइल ने दी ईरान को सैन्य हमले की धमकी, ईरान ने कहा, देंगे करारा जवाब

ईरान और इसराइल के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती जा रही है। इसराइल के रक्षा मंत्री बेनी गंट्ज़ ने कहा है कि उनका देश ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। गंट्ज़ ने ईरान को ‘वैश्विक और क्षेत्रीय समस्या’ बताया है।

 

इब्राहिम सईदी/The Irish Times

 

दोनों देशों के बीच यह तनाव तब बढ़ रहा है जब हाल ही में इब्राहिम रईसी ने ईरान के राष्ट्रपति पद का कार्यभार सम्हाला है। इससे पहले ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर इन चीफ़ हुसैन सलामी ने कहा था कि ‘जो देश ईरान को धमकी देते हैं (ख़ासकर इसराइल), उन्हें ईरान की हमला करने और बचाव दोनों क्षमताओं के बारे में सही समझ विकसित कर लेनी चाहिए।’
सलामी ने कहा, “हम किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार हैं और मेरा यह संदेश एक एक्शन है, कूटनीति नहीं।”

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने कहा, “इसराइल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करते हुए ईरान को सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। ऐसा दुर्भावनापूर्ण व्यवहार पश्चिमी देशों के अंध समर्थन से पैदा होता है। हम साफ़-साफ़ कहते हैं- ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी मूर्खतापूर्ण कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा। हमारा इम्तिहान मत लीजिए।”

बता दें कि बीते दिनों इसराइली कंपनी के तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद ईरान और इसराइल के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है, जिस हमले में एक ब्रितानी और एक रोमिनायाई नागरिक की मौत हो गई थी। इसराइल ने इस घटना का ज़िम्मेदार ईरान को ठहराया था और दावा किया था कि यह सिद्ध करने के लिए उसके पास ‘सबूत’ हैं।

वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने राष्ट्रपति रईसी से ऐतिहासिक परमाणु हमले पर बातचीत बहाल करने की बात कही है। अमेरिका ने चेतावनी भरे लहज़े में कहा है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मसलों पर बातचीत के मौक़े हमेशा के लिए मिलेंगे।

बता दें कि ईरान और अमेरिका के संबंधों में 2018 के बाद से खटास पैदा हो गई जब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी को परमाणु समझौते से अलग कर ईरान पर कड़ी पाबंदियाँ लगा दी थीं।

इब्राहिम रईसी ने अपने शपथ ग्रहण के दौरान कहा था कि वे ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने का प्रयास करेंगे।
रईसी ने कहा था, “ईरान के ख़िलाफ़ लगे सभी ग़ैरक़ानूनी प्रतिंबध हटाए जाने चाहिए।”

ग़ौरतलब है कि पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन ईरान इस आरोप से इनकार करता आया है।

दरअसल साल 2015 में ईरान और छह देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, रूस और जर्मनी) के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत अमेरिका को यूरेनियम संवर्धन को कम करना था और बदले में ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदियाँ हटाए जाने पर सहमति बनी थी। लेकिन बाद में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की सीमा बढ़ा दी थी और ट्रंप ने अमेरिका को समझौते से अलग कर लिया था।

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