May 14, 2021

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जापान के दूषित पानी को समुद्र में छोड़ने के फ़ैसले से दुनियाँभर में छिड़ी बहस

जापान ने फुकुशिमा परमाणु स्टेशन से 1 मिलियन टन से अधिक दूषित पानी समुद्र में छोड़ा जाएगा। मंगलवार को सरकार ने इस बात की घोषणा की। ग़ौरतलब है कि यह घोषणा तब की गई है जब जापान के पड़ोसी देश और उसके मछुआरों ने इस बात का विरोध किया है।

प्लांट संचालक टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर को हानिकारक आइसोटोप हटाने, बुनियादी ढांचे के निर्माण और विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने के साथ ही पानी की फ़िल्टरिंग कर उसे साफ़ करने का पर्याप्त समय देने के बाद उसकी पहली रिलीज़ लगभग दो वर्षों में होगी।
जापान ने तर्क दिया है कि 2011 में आए भूकंप और सुनामी से बुरी तरह प्रभावित होने के बाद संयंत्र की जटिल डीकमीशनिंग के साथ आगे बढ़ने के लिए पानी छोड़ना आवश्यक है। उसने इस ओर भी इशारा किया कि दुनियाभर के परमाणु संयंत्रों के लिए फ़िल्टर्ड पानी नियमित रूप से समुद्रों में छोड़ा जाता है।
Fukushima nuclear station Credit- Reuters
लगभग 500 ओलंपिक आकर के स्विमिंग पूल को भरने की क्षमता रखने वाला तक़रीबन 1.3 मिलियन टन दूषित पानी, फुकुशिमा दाइची संयंत्र में लगभग 100 बिलियन येन (912.66 मिलियन डॉलर) की वार्षिक लागत के साथ विशाल टैंकों में संग्रहित किया जाता है जिसकी जगह अब भरने भी लगी है।

क्या है सरकार का पक्ष?

सरकार ने एक बयान में कहा, “नियामक मानकों के साथ सख्त अनुपालन के आधार पर, हम महासागरीय रिलीज का चयन करते हैं।”
Prime minister Yoshihide Suga Credit- Reuters

जापान की सरकार का कहना है कि यह पानी समुद्र में छोड़ना सुरक्षित है क्योंकि पानी को प्रोसेस करके इससे सभी रेडियोएक्टिव तत्व निकाल दिए जाएंगे और पानी डाइलूट होगा। इस योजना का समर्थन करते हुए International Atomic Energy Agency (IAEA) ने कहा है, ‘यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसा दुनिया में कहीं भी न्यूक्लियर प्लांट के अपशिष्ट पानी का निस्तारण किया जाता है’।

देश के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने मंत्रियों की बैठक में कहा कि पानी के निस्तारण की इस प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। न्यूक्लियर प्लांट को खाली करने की प्रक्रिया दशकों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि पानी को छोड़ने की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब उसके सेफ़्टी लेवल को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाएगा।

दुनियाँभर में इस फ़ैसले से चिंता

बता दें कि 2011 में आई सुनामी में फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट ख़तरनाक तरीके से प्रभावित हुआ था। यहां से रेडिएशन लीक होने लगा था और हज़ारों की संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।
हालाँकि कि इस प्रक्रिया को शुरू होने में दशकों लग जाएँगे लेकिन जापान के इस क़दम से पूरी दुनिया में एक नई बहस छिड़ गई है।
दक्षिण कोरिया ने “गंभीर चिंता व्यक्त की कि यह निर्णय हमारे लोगों और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है।” दक्षिण कोरिया ने जापान को इस योजना के विषय में अधिक जानकारी प्रदान करने के लिए भी कहा है।
इस क़दम पर चीन और ताइवान ने भी चिंता जताई है।
Credit- Reuters
फुकुशिमा में मछली पकड़ने वाली यूनियनों ने सरकार से इस पानी को समुद्र में न छोड़ने की माँग की है और बताया है कि ऐसा करने से उनकी इंडस्ट्री पर “विनाशकारी प्रभाव” पड़ेगा। 
फुकुशिमा के पानी का अध्ययन करने वाले बुसेलर बताते हैं “ये काँटामिनटेड पदार्थ, स्वास्थ्य को ट्रिटियम से अधिक नुक़सान पहुँचाएँगे क्योंकि ये समुद्री भोजन और समुद्री तल के तलछट में अधिक आसानी से जमा हो जाते हैं।”
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