September 24, 2021

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राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए कल्याण सिंह, अंतिम संस्कार के समय योगी, अमित शाह और शिवराज सिंह समेत सैकड़ों नेता जुटे

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का दाह संस्कार हो गया है। कल्याण सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए है। बुलंदशहर के नरौरा स्थित बंशी घाट पर कल्याण सिंह बाबू जी का अंतिम संस्कार हुआ है। बाबू जी को उनके बेटे और एटा के सांसद राजवीर सिंह ने मुखाग्नि दी है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, भारत के गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और अन्य दिग्गज नेता मौजूद रहे है। बाबू जी के दाह संस्कार के समय हजारों लोग बंशी घाट पर मौजूद रहे।

कल्याण सिंह का दाह संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया गया है। बाबूजी के अंतिम संस्कार में 21 आचार्यों ने मंत्रोच्चारण के साथ दाह संस्कार किया। उनका दाह संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया है। पूरा देश उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहा है। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।

कल्याण सिंह के निधन पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने 3 दिनों का राजकीय शोक की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान पर सोमवार को उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल और कॉलेज बंद है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी लखनऊ कार्यालय में कल्याण सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, ‘हम सब के लिए यह दुखद समाचार है। कल्याण सिंह जी हमारे बीच नही रहे। पिछले दो माह से वो अस्वस्थ थे। उपचार चल रहा था। आज करीब सवा 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने शासन में अपने कार्यकाल के दौरान जो निर्णय लिए वो आज भी मानक बने हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के आंदोलन के लिए यदि सत्ता छोड़नी पड़ी तो उन्होंने तत्काल पद से इस्तीफा दिया। कल्याण सिंह जी का जाना ना सिर्फ समाज के लिए बल्कि भारतीय जनता पार्टी के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।’

कल्याण सिंह का जीवन
कल्याण सिंह का जन्म 6 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था। कल्याण सिंह के 2 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कई बार अतरौली के विधानसभा सदश्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। साथ ही साथ ये उत्तर प्रदेश में लोक सभा सांसद और राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। पहली बार कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वर्ष 1991 में बने और दूसरी बार यह वर्ष 1997 में मुख्यमंत्री बने थे। ये प्रदेश के प्रमुख राजनैतिक चेहरों में एक इसलिए माने जाते हैं, क्योंकि इनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही बाबरी मस्जिद की घटना घटी थी।

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