November 27, 2021

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सुप्रीम कोर्ट के सामने रोहिंग्याओं को विस्थापित न करने वाले अपने पुराने बयान से मुकरी कर्नाटक सरकार

कर्नाटक की भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक संशोधित हलफ़नामा दायर किया है, जो अपने पहले के बयान से मुकर गया है कि बेंगलुरु में रहने वाले रोहिंग्याओं को निर्वासित करने की तत्काल कोई योजना नहीं है।

 

New Delhi India – October 28, 2017: People visit Supreme Court of India in New Delhi

 

एक ताज़ा हलफ़नामे में, गृह विभाग ने कहा है कि कर्नाटक राज्य पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र में किसी भी शिविर या हिरासत केंद्र में रोहिंग्याओं को नहीं रखा है। हालांकि कर्नाटक राज्य में 126 रोहिंग्याओं की पहचान की गई है।

विभाग ने ये भी कहा है कि शीर्ष अदालत जो भी आदेश देगी, उसका ईमानदारी से शब्दशः पालन किया जाएगा।

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा 2017 जनहित याचिका में दायर राज्य सरकार की लिखित प्रतिक्रिया ने अदालत से अवैध रोहिंग्याओं को निर्वासित करने के लिए अदालत के निर्देश की मांग वाली याचिका को खारिज करने के लिए कहा था।

इसने पहले उपाध्याय की याचिका को नाक़ाबिल और क़ानून व तथ्यों में रखने योग्य होने से इनकार कर दिया गया था। राज्य सरकार ने पहले कहा था, “बेंगलुरू शहर में पहचाने गए 72 रोहिंग्या विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और बेंगलुरु शहर की पुलिस ने अब तक उनके ख़िलाफ़ कोई कठोर कार्यवाई नहीं की है और उन्हें तत्काल निर्वासित करने की अभी कोई योजना नहीं है।”

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